Tuesday, February 16, 2010

मुहब्बत कबाब है॥

मुहब्बत कबाब है॥
खाना पसंद करते है॥
यार जब बिछुड़ता है॥
हर पल आंसू गिरते है॥
खो जाती है लालिमा॥
चेहरा मुरझा जाता है॥
महकते उपवन में ॥
अन्धेरा नज़र आता है॥
किसी किसी के मुकद्दर में॥
फिर से कमल खिलते है॥

3 comments:

  1. मुहब्बत कबाब है ये तो सही है पर उसी रेसिपी कहाँ है

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--- संजय सेन सागर

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