Sunday, February 7, 2010

विवादों की गंगा में हाथ धोते हमारे लेखक


भारतीय सिनेमा एक बहुत ही शानदार दौर से गुजर रहा है। एक ही माह के भीतर हमारे पास कॉस्टच्यूम ड्रामा वीर, ग्रामीण प्रेम कहानी इश्किया, देशभक्ति पर आधारित संगम, ऐतिहासिक फिल्म राजा हरिश्चंद्र ची फैक्ट्री और मीडिया को उजागर करती रण फिल्मंे हैं। लेकिन इनमें से कुछ को लेकर विवाद भी पैदा हो गए हैं।
रामगोपाल वर्मा को वैसे भी विवादों से कुछ ज्यादा ही लगाव रहा है। रण की रिलीज के दस दिन पहले ही एक फ्रीलांस पत्रकार ने फिल्म निर्माता को यह दावा करके बॉम्बे हाईकोर्ट में खींच लिया कि फिल्म उसकी कहानी ‘ब्रेक के बाद’ पर आधारित है। रिलीज को खतरे में डालने के बजाय फिल्म निर्माताओं को कॉपीराइट से जुड़े विवाद को निपटाने में ही भलाई नजर आई। लेकिन वर्मा इस फैसले से खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि इन दिनों अपनी किताब को लोकप्रिय करने का यह अच्छा फंडा बन गया है कि फिल्म निर्माताओं पर कहानी चुराने का आरोप मढ़ दो।
वीर के निर्देशक अनिल शर्मा भी वर्मा से सहमत हैं, क्योंकि फिल्म के निर्माता विजय गलानी और अभिनेता-लेखक सलमान खान के साथ उनके खिलाफ भी गुड़गांव के एक लेखक की किताब से एक संवाद लेने की वजह से कोर्ट केस दायर किया गया है। लेखक पवन चौधरी ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दावा किया है कि फिल्म में एक लाइन उनकी किताब ‘सफलता की त्रिवेणी : चाणक्य का राजनीतिक ज्ञान’ से ली गई है। यदि थ्री इडियट्स की सफलता के लिए चेतन भगत को 1k0 लाख रुपए का बोनस दिया गया और सोनल मेहता को उनका मुंह बंद रखने के लिए रण के निर्माता ने भारी धनराशि दी तो चौधरी ने वीर के निर्माताओं से 20 लाख रुपए की मांग की है। फिल्म निर्माताओं के साथ लेखकों की लड़ाई लड़ने वाले अंजुम राजाबाली का कहना है कि अनुंबधों में पारदर्शिता का वक्त आ गया है।
इतिहास खुद को दोहराता है। कुछ साल पहले तीन फिल्म निर्माता भगतसिंह पर फिल्म बना रहे थे। इस बार बारी चटगांव विद्रोह के महान नायक सूज्र्यसेन की है। उन पर दो फिल्में बन रही हैं। आशुतोष गोवारीकर अभिषेक बच्चन को लेकर खेलें हम जी जान से बना रहे हैं, जबकि सोनाली बोस ने मनोज वाजपेयी को क्रांतिकारी की भूमिका के लिए चुना है। उम्मीद करें कि भगतसिंह के विपरीत सूज्र्यसेन की फिल्में किसी विवाद में नहीं फंसेंगी।
अक्सर फिल्में वास्तविक घटनाओं का अनुसरण करती हैं, लेकिन कभी-कभार फिल्मों से भी कुछ करने की प्रेरणा मिल जाती है। चक दे इंडिया में एक करिश्माई हॉकी कोच भारतीय महिला हॉकी की कमियों को दूर करके उसे विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन ‘रियल लाइफ’ में ‘रिल लाइफ’ का अनुसरण करते हुए भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों ने शाहरुख खान की अनुपस्थिति में भी एकजुट होकर अपने हक की आवाज उठाई। महिला खिलाड़ियों ने अपने साथ भेदभाव का विरोध करते हुए भोपाल के एक बैंक में संयुक्त खाता खुलवाया है। शाहरुख खान, यदि आपने इसके बारे में पढ़ा है तो बैंक खाते में एक चेक आपकी ओर से भी पहुंचना चाहिए।
लेखिका की हिंदी सिनेमा पर नौ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।


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1 comment:

  1. mujhe to yahi lagta hai ki lekhakon ke saath nainsaafi hoti hai....bade bade film nirmata paise ke bal par lekhak ko khamosh karwa dete hain...rahi baat 3 idiots ki to wo 90% five point someone ki copy hai

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--- संजय सेन सागर

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