Sunday, January 31, 2010

जरा socho sallu


अभी सलमान खान को टीवी पर बोलते सुना कि फिल्म समीक्षकों को क्या मालूम कुछ भी लिखते रहते है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरी फिल्म को रेटिंग से फर्क नहीं पड़ता। जिनको वीर देखनी है वे जरुर आयेंगे। मैं कहना चाहता हु कि देश के अखबारों में समीक्षा करने वाले वही लोग है जिन्होंने आपकी वांटेड को सुपरहिट करार दिया था। इन्ही लोगो ने लन्दन ड्रीम्स पिटने के बावजूद आपका काम सराहा था। रही बात दर्शको की समीक्षा पर विश्वास करने की तो एक बात और सुन ले सल्लू भाई कि जय प्रकाश चोकसे, तरन आदर्श, कोमल नाहटा की कलम पर लोग भरोसा करते है। आजकल आप लोग मनोरंजन के नाम पर क्या परोसते है, sabko मालूम है। वीर के पिटने kee के kaarno के bare में aapko sochna hoga। एक piriyad movie tab safal hoti है jab दर्शको को ye ahsas ho कि वे vaakai में prachin kaal में pahuch gaye है। us sammohan को आपकी जरा si galti tartar kar deti है। वीर में भी aisa hi hua है। आपकी फिल्म १९२० से shuru hoti है और flashback में १८६८ में jaa pahuchti है। iska kul 52 saal ka samya hota hai. is vakt me veer ka beta keval 25 saal ka dikhaya gaya hai. aise kai galtiyo ne aur anil shrma ke bakvaaws direction ne film ka bedagark kar diya. ab jara dialouge ki bangi pesh hai. veer ek pindari ke badan se maans noch leta hai aur kahta hai taul lena paanch ser hi hoga. bhaiya veer hamare naap taul vibaag ke inspector kyo nahi ban jate. salmaan ji pahle ek darshak ki nigah se movie dekhe aur aap chahe to main desh ke sare film critic ki aur se veer ke ek ek scene par aapse baat karne ko raji hu.
'aaj hindustaan ka dard me koi technical problam hai hindi me type nahi ho raha. sorry'

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...