Friday, January 29, 2010

सियासत की बिसात पर नफरत के नायक


भारतीय राजनीति में ऐसे लोग बड़ी तेजी सीढ़ियां चढ़ते दिखाई देते हैं। जो नफरत की भाषा बोलते हैं। हालांकि इससे उन्हें भले ही तात्कालिक लाभ होता हो लेकिन दीर्घकालीन तौर नुकसान आम हिंदुस्तानी का ही होता है। महाराष्ट्र से ठाकरे एंड पार्टी उत्तर भारतीयों को खदेड़ती है तो लूटियंस की दिल्ली में विराजमान शीला दीक्षित भी राजधानी की दुर्दशा के लिए उप्र और बिहार के बाशिंदों पर निशाना साधती हैं। दूसरी ओर, गुजरात के नरेंद्र मोदी से लेकर वरुण गांधी तक मुस्लिम समुदाय के लोगों पर हमले करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। इनकी नजर में हर अल्पसंख्यक देशद्रोही है। कुछ लोगों ने प्रदेश की सीमाओं में भाषा-जाति के आधार पर भी अपनी सियासत चमकाई हुई है। देश के ऐसे ही नफरत की तिजारत करने वाले सियासी वीरों पर आइए नजर डालते है॥


ठाकरे की ठसक॥हिंदुस्तान में यदि राजनीति का सबसे बड़ा खलनायक यदि कोई है तो वह हैं शिवसेना के प्रमुख बाला साहेब ठाकरे। कभी महाराष्ट्र के शेर के नाम से विख्यात ठाकरे भले ही बूढ़े हो गए हों लेकिन उनकी जुबान अभी भी आग उगल रही है। कभी सचिन तो कभी अमिताभ पर हमला साध चुके ठाकरे के निशान पर अब मुकेश अंबानी आ गए हैं। साठ के दशक में दक्षिण भारतीयों के खिलाफ किया गए आंदोलन के बाद अब उनके निशाने पर उत्तर भारतीय पर आ गए हैं।


घृणा की राज-नीति॥बाला साहेब ठाकरे की राजनीति की जिम्मेदारी अब राज ठाकरे ने ले ली है। शिवसेना से बगावत कर खुद की पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे का एक सूत्री कार्यक्रम मुंबई से उत्तर भारतीयों की सफाई करना है। कभी लोगों को अपने परदेश लौट जाने की धमकी तो कभी मराठी सीख लेने की घमकी। कुल मिलाकर छोटे ठाकरे चाचा से किसी भी तरह कम नहीं हैं।


शीला की सनक॥हमेशा सौम्य और शांत दिखने वाली शीला दीक्षित जब भी दिल्ली के विकास के लिए जुबान खोलती हैं तो उनके निशाने पर हमेशा पड़ोसी राज्य के ही लोग रहते हैं। शीला बार-बार कह चुकी हैं कि उप्र और बिहार के लोगों ने दिल्ली में नर्क मचाया हुआ है। दिल्ली में बाहरी लोग बढ़ते जा रहे हैं लेकिन आसपास के राज्य दिल्ली को अपनी एक इंच देने के लिए भी तैयार नहीं है। शीला के बयान के बाद खुद बाल ठाकरे ने उन्हें शबासी देते हुए कहा था कि कांग्रेस में यदि इंदिरा गांधी के बाद कोई मर्द है तो वह हैं शीला दीक्षित। आखिर ठाकरे खुश भी क्यों नहीं होते? आखिर शीला भी तो उन्हीं की जुबान बोलती हैं।


वरुण का विष..गांधी खानदान का यह वारिस अपने परिवार के अन्य लोगों से बिलकुल जुदा है। भगवा तिलक लगाकर घूमने वाले वरुण गांधी राजनीति में उस वक्त अचानक छा गए, जब उन्होंने एक चुनावी सभा के दौरान मुसलमानों पर निशाना साधते हुए यहां तक कह डाला था कि जो हिंदुओं की तरफ हाथ भी उठाएगा, उसका वह हाथ काट देंगे। इसके अलावा भी उन्होंने जमकर जहर उगला था। लेकिन वरुण के जहरीली बयान के चलते वरुण को कई दिनों तक जेल की हवा खानी पड़ी। जब रिहा होकर बाहर आए तो सख्त जबान थोड़ी नरम हो चुकी थी।


माया की महिमाउप्र की मुख्यमंत्री मायावती के निशाने पर हमेशा सवर्ण तबके के लोग रहे हैं। अपने को दलित की बेटी कहने वाली मायावती अपनी कुंठा हमेशा वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और नेताओं पर निकालती हैं। इसके अलावा उनके भाषण में अपने विरोधियों के लिए कई आपत्तिजनक शब्द रहते हैं। लेकिन यदि सबसे अधिक कोई निशाने पर रहता है तो वह हैं मुलायम सिंह यादव।

भास्कर.कॉम

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