Monday, January 25, 2010

अब देर न कर रूठन वाले॥

रूठ कर क्यों बैठे हो टूटे दिल॥
हमसे भी ज़रा तो बात कर ले॥
सूखा है समुन्दर तपिस बढ़ी॥
हे मेघ ज़रा बरसात कर दे।
हरियर क्यारी हो जायेगी॥
कलियों का खिलाना जारी होगा॥
भवरे भी मचलते आयेगे॥
हे यार अब उपकार कर दे॥
हम आस लगाए बैठे है कब से॥
तुम मांग सजाओ गे मेरी॥
सोलह सिंगर जब कर निकालू॥
सकुचा जाएगी समय घडी॥
अब देर न कर रूठन वाले॥
थोड़ी से मुस्कान दे दे॥

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--- संजय सेन सागर

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