Thursday, January 21, 2010

लो क सं घ र्ष !: जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा
घनतम दूर भागना है तो, ज्ञान-प्रदीप जलना होगा

खिलता है कांटो में गुलाब जग में सौरभ फैलाता है
शीत, ताप, झंझा झकोर से, कब पंकज मुरझाता है

जीवन सुरभित करना है तो, आदर्श इन्हें बनाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

संघर्षनाम है जीवन का, जीवन संघर्ष के बिना कहाँ?
है वहीँ सफलता का निवास, कर्तव्य बोध संघर्ष जहाँ

पथ पर बिखरे पषाणों से , पग-पग पर टकराना होगा
जीवन सफल बना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

कर्तव्यों से विमुख होना है तो, भाग्य भरोसे बैठे रहना
यदि गंतव्य को पाना है तो, पथिक निरंतर बढ़ते रहना

थककर बैठ जाना प्यारे! आजीवन पछताना होगा
जीवन सफल बना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

जीवन हो विष का प्याला, पर इसे सुधा सम पीना होगा
युग के झंझावातों में भी, हँस-हँस कर के जीना होगा

कितना ही कंटकमय पथ हो, आगे बढ़ते जाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा

मन को विचलित करने वाले, कुछ ऐसे भी क्षण आयेंगे
संकट की काली छाया से, माथे पर बल जायेंगे


- मोहम्मद जमील शास्त्री

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