Tuesday, January 19, 2010

दुल्हन बिना दहेज़ की..

ये सातवे आसमान के तीसरे कसबे की मन गढ़ंत कहानी है॥
मल्लू नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके बहुत दिनों के बाद एक संतान की उत्पति हुयी॥ उसका और उसके पत्नी का ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। उस लडके का नाम उठल्लू रखा गया॥ लड़का धीरे -धीरे बड़ा होता चला तो उसका नाम स्कूल में लिखा दिया सेठ जीने वह पढाई के साथ-साथ शिव का बहुत बड़ा भक्त निकला अधिक समय उसका शिव पूजा में लीन रहता था। लेकिन वह अपने बाप के व्यापार में मदद नहीं करता था। इस बात को लेके सेठ चिंचित रहा करते थे॥ फिर सोचते थे कोई बात nahi धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा क्यों की वह अकेला ही वह उनके कुल का चिराग था। इस लिए सेठ जी अपने लडके को कभी कुछ नहीं कहते थे॥ वैसे भी लड़का सर्बगुन संपन्न था। उसे धीरे धीरे उसको दैवी शक्तिया भी प्राप्त होने लगी॥ इसकी चर्चा सातवे आसमान के हर कोने में फ़ैल गयी॥ एक दिन की बात है, अपने दोस्त की शादी में वह बाराती बन के गया था॥ वहा जो घटनाएं हुयी वह बहुत दर्दनाक थी । हुआ यूओ की दुल्हे तथा दुल्हे के परिजन वादे के मुताबिक दहेज़ न मिलाने से झगड़ रहे थे॥ और कह रहे थे की हम बरात वापस ले जायेगे अगर दहेज़ नहीं मिला तो॥ लड़की का बाप गरीब था। वह हाथ जोड़ कर गिर्गिदा रहा था। लेकिन वे लोग लोभी थे। बरात को वापस लाने लगे जिससे लड़की का बाप गश खा कर गिरा और वही दम तोड़ दिया॥ वही हाल लड़की की माँ का हुआ और लड़की का भी आखिर में बरात तो बिना दुल्हन के वापस आ गई । इस बात से उठल्लू को बड़ा दुःख हुआ और हमेशा उदास रहता था। जिससे सेठ और सेठानी को भी उदासी में दाल दिया॥ आखिर में सेठ जी लडके को अपने पास बुलाये और बोले क्या बात है बेटा ? क्यों उदास रहते हो॥ क्या कारण है॥ तब लडके ने बोला की मै घोषणा करता हूँ कि॥ अगर मै शादी करूगा तो बिना दहेज़ कि दुल्हन चोनी चाहिए नहीं तो मै आजीवन कुवारा ही rahugaa। लेकिन सेठ ने chaturayi से usaki बात को maan लिया ठीक है जैसे तुम कहोगे वैसे हम करेगे॥ कुछ दिन के बाद एक रिश्ता आ ही गया और सेठ जी ने लड़की के बाप को साड़ी बाते बता दी लेकिन उन्होंने बोला कि हम दह्ज़ लेगे। वह भी गुप्त हो जो हमारे लडके को पता न लगे । लड़की के बाप ने बोला ठीक है॥ शादी कि तारीख पक्की हो गयी। अब लडके को पता चला तो वह अपने बाप से बोला पिटा जी आप हमारी बात को फिर से सुन लो ॥ न तो हमारी ससुराल को कोइ पानी पिएगा नाटो कुछ खायेगा॥ न तो कुछ लेगा॥ और लड़की के बस्तर गहने हमारे घर के होगे नहीं तो हम शादी नहीं करेगे॥ अगर आप दहेज़ लेगे तो उसका बुरा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना सेठ ने बोला ऐसा भी होगा। और बरात चल पड़ी॥ गाँव के समीप बरात पहुचने पर स्वागत के लिए लड़की के परिजन आये ..लोग नाचने गाने और औसराओ का नाच देखने में मस्त थे। अब उठल्लू को ख्याल आया कि यहाँ पर तो स्वागत के लिए सारे पकवान बन गए है॥ तब उसने शिव जी को याद किया और कहा हे प्रभू मेरी प्रतिज्ञा safal honi चाहिए jitane लोग है । सब का pet पर jaaye और अप्सराओं के नाच मस्त रहे जब तक हम यहाँ से घर न पहुचे और वैसे ही हुआ । सारे पकवान लड़की को देने के लिए जितने उपहार /सामान थे सारे राख हो गए ..और जब लड़की के बाप ने दुल्हे के बाप को रूपया देना के हाथ आगे बढाया तो उसमे भी आग लग गयी सब राख हो ॥ तब उठाल्लो ने कड़कती आवाज़ में बोला कि मै घोषणा कर चुका कि हमारी शादी बिन दहेज़ के होगी॥ तो वही होना चाहिए नहीं तो परिणाम और भयंकर हो सकता है॥ लडके और लड़की का बाप दोने बोले वैसे भी होगा । फिर वैसे ही बिना दुल्हन के दहेज़ कि शादी हुयी ॥ दुल्हन जब घर आई तो घर पर आते ही पुरवा गीत गाने लगी आसमान से पुष्प कि वर्षा हुयी समस्त खुशिया उठल्लू को मिल गयी फिर उठल्लू ने अपनी पत्नी से पूछा प्रिये आप कुछ तो दहेज़ में तो लायी नहीं है॥ तो पत्नी बोली लायी हूँ सिर्फ अछे संस्कार और बिचार ॥ उठल्लू खुश हुआ और अपनी नयी जिंदगी की shuruwaat किया॥

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--- संजय सेन सागर

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