Skip to main content

लो क सं घ र्ष !: पुलिस ठगी गयी अपने जाल साजों से

उत्तर प्रदेश पुलिस आये दिन आतंकवाद से लेकर भ्रष्टाचार से लड़ने तक का दावा करती रहती हैविभाग में कार्यरत जालसाजों ने 1986 में एक शासनादेश में परिवर्तन कर उसको पूरे विभाग के ऊपर लागू करा दियापुलिस विभाग में नियम यह है कोई पुलिस कर्मचारी पुलिस अफसर अपने गृह जनपद या गृह के नजदीक तैनात नही रह सकता है , किंतु जालसाजों ने 11 जुलाई 1986 में एक फर्जी शासनादेश जारी कर उस नियम में परिवर्तन कर लिया और उनके अपने गृह जनपद में भी तैनाती होने लगी । अपराधियों से साँठ-गाँठ करना तथा अपराधों में भी लिप्त होना लगा रहेगा । उत्तर प्रदेश गृह विभाग के भोले-भाले अधिकारी पुलिस के उच्च अधिकारी फर्जी शासनादेश को लागू करते रहे है । अब जाकर इस खुलासा हुआ है कि उक्त शासनादेश फर्जी हैइससे पहले पुलिस विभाग की भर्तियाँ फर्जीवाड़ा का एक उत्कृष्ट नमूना हैऐसे भोले भाले अधिकारियों से कानून व्यवस्था बचाए और बनाये रखने की उम्मीद रखना बेईमानी है
आज जरूरत इस बात की है कि पूरे पुलिस विभाग की ईमानदारी से समीक्षा की जाए और अपराधी और भ्रष्टाचारी तत्वों से उसको साफ़ किया जाएवर्तमान में पुलिस के क्रियाकलापों को देखकर माननीय न्यायमूर्ति आनंद नारायण मुल्ला की टिपण्णी याद जाती है कि पुलिस अपराधियों का एक संगठित गिरोह है, इसके अतिरिक्त कुछ नही हैआये दिन पुलिस अपने जालसाजों से ठगी जायेगी और जनता तबाह होती रहेगी और सबसे बड़े आश्चर्य कि बात यह है कि जिस तरीके से अपराधियों का अपराधिक इतिहास होता है उसी तरीके से थाने से लेकर पुलिस प्रमुख तक का भी अपराधिक इतिहास होता है , सिर्फ़ उसको प्रकाशित करने कि जरूरत है ।

सुमन
loksangharsha.blogspot.com

Comments

Popular posts from this blog

युवाओं में लोकप्रिय 'मस्तराम' पर बनेगी फिल्म, लेकिन नहीं होगी अश्लील

अखिलेश जायसवाल ‘मस्तराम’ नामक फिल्म बनाने जा रहे हैं। विगत सदी के मध्यकाल में ‘मस्तराम’ नामक काल्पनिक नाम से कोई व्यक्ति अश्लील किताबें लिखता था, जिन्हें उस दौर के अधिकांश कमसिन उम्र के लोग चोरी-छुपे पढ़ते थे। मध्यप्रदेश और राजस्थान तथा ग्रामीण महाराष्ट्र क्षेत्र में ‘भांग की पकौड़ी’ नामक अश्लील उपन्यास युवा लोगों में अत्यंत लोकप्रिय था। अध्यात्मवादी भारत में सेक्स विषय को प्रतिबंधित किया गया, इसलिए मस्तराम और भांग की पकौड़ी जैसी गैर वैज्ञानिक एवं नितांत घातक किताबें चोरी छुपे खूब पढ़ी गई हैं और 21वीं सदी में भी इस विषय को प्रतिबंधित ही रखा गया है तथा पाठ्यक्रम में कभी शामिल नहीं किया गया है, जिस कारण मनोवैज्ञानिक गुत्थियां कमसिन उम्र के अपने भूत रचती रही हैं। अखिलेश दावा कर रहे हैं कि वे मस्तराम की काल्पनिक आत्मकथा पर फिल्म रच रहे हैं और अश्लीलता से अपनी फिल्म को बचाए रखेंगे। कमसिन उम्र एक अलसभोर है, जिसमें अंधेरा ज्यादा और रोशनी कम होती है। आज इंटरनेट पर उपलब्ध अश्लील फिल्में कम वय के लोगों को जीवन के सत्य का एक अत्यंत काल्पनिक और फूहड़ स्वरूप उपलब्ध करा रही हैं। टेक्नोलॉजी ने अश्ली…

हीरों की चोरी

आमतौर पे जब भी ये बात होती है की अंग्रेजों ने किस सबसे कीमती हीरे या रत्न को अपने देश से चुराया है तो सबके ज़बान पे एक ही नाम होता है- कोहिनूर हीरा.जबकि कितने ही ऐसे हीरे और अनोखे रत्न हैं जो बेशकीमती हैं और जिन्हें विदेशी शाशकों और व्यापारी यहाँ से किसी न किसी तरह से ले जाने में सफल रहे.कितने तो ऐसे हीरे और रत्न हैं जो हमारे देश के विभिन्न मंदिरों से चुराए गए...इस पोस्ट में देखिये कुछ ऐसे दुर्लभ,अनोखे और अदभुत हीरे,जो हमारे देश में पाए गए लेकिन अब अलग अलग मुल्कों में हैं या फिर कहीं गुमनाम हो गए हैं.


कोहिनूर


कोहिनूर के बारे में किसे नहीं पता, हर भारतीय को शायद ये मालुम होगा की यह बहुमूल्य हीरा फिलहाल ब्रिटिश महारानी के ताज की शोभा बढ़ा रहा है.105 कैरट  का कोहिनूर एक दुर्लभ हीरा है और यह हीरा आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा खान में मिला था.गोलकुंडा खान बहुत समय तक(जब तक ब्राजील में हीरों की खोज नहीं हुई थी)विश्व में हीरों का एक मात्र श्रोत था.कोहिनूर हीरा कई राजा महराजाओं के पास से होता हुआ अंततः महाराज रंजीत सिंह के पास पंहुचा.महराज रंजीत सिंह की मरते वक्त ये आखरी ईच्छा(उनके वसीयत में भी इस ब…

रूसो का विरोधाभास ......

रूसो को प्रजातंत्र का पिता माना जाता है ।
अन्य प्रबुद्ध चिन्तक जहाँ व्यक्ति के स्वतंत्रता की बात करते है , वही रूसो समुदाय के स्वतंत्रता की बात करता है ।
अपने ग्रन्थ सोशल कोंट्रेक्त में घोषित किया की सामान्य इच्छा ही प्रभु की इच्छा है ।
रूसो ने कहा की सभी लोग समान है क्योंकि सभी प्रकृति की संतान है ।
कई स्थलों पर रूसो ने सामान्य इच्छा की अवधारणा को स्पस्ट नही किया है ।
एक व्यक्ति भी इस सामान्य इच्छा का वाहक हो सकता है । अगर वह उत्कृष्ट इच्छा को अभिव्यक्त करने में सक्षम है ।
इसी स्थिति का लाभ फ्रांस में जैकोवियन नेता रोस्पियर ने उठाया ।