Saturday, November 21, 2009

खटमल की विरादरी..

हुआ यूं की हम अपने बड़े पिता जी के साथ अपने चचेरे भाई की ससुराल गए थे। भैस लाने गए थे ,जी की दहेज़ में मिली थी। वहा पहुचने पर स्वागत सत्कार हुआ। बैठे बैठे हम और बडके पापा बातें कर रहे थे। लगा की जैसे कुछ काट रहा हो। तो हमने पापा से बोला लगता है, हमें कुछ काट रहा है, तो बडके पापा ने टार्च जला के देखा तो बोले बेटे यहाँ तो सोना मुशिकल है क्यो की खटिया में बहुत ही खटमल है । और सावन का महीना था बादल छाए थे। हमने बोला मैतो यही सोऊ गा क्यो की बार बार उठने से नींद ख़राब होगी। बेटा देखना नींद ही नही आएगी खटमल जाति बड़े सवादी होते है। अभी देखना कैसे इनकी मंडली जुटती है। ये अपने आस पास के सभी खटमलो को नेवता भेज दिए होगे। आज रात में आ जाना नए नए लोग आए है फलाने के यहाँ । मै उंकी बातो को सुन कर हँसाने लगा तब तक खाना खाने के लिए बुलावा आया हम लोग खाना खाने चले गए। खाना खाने के बाद हम और बडके पापा पेशाब करने के लिए बाहर गए की बदके पापा ने टार्च जलाया तो बोल पड़े इधर देख बेटा जब मै बता रहा था तो तू हंस रहा था । अब अपनी आँख से देख ले मै देखा तो अचम्भे में पड़ गया की वास्तव में खटमल की विरादरी क्या होती है? जो चीटियों की तरह झुण्ड बना के आ जा रहे थे। वापस आने के बाद हमने खटिया को पटक दिया देखते ही देखते कम से कम २ किलो तक खटमल खटिया केनीचे गिर गए मै अपना विस्तर और पापा का विस्तर लेके सामने कुआ था तो कुआ की जगत पर जा के लेट गया और सोचा की जब बरसात होगी तक देखा जाए गा। मै तो जल्दी सो गया और पापा भी सो गए थे करीब दो घंटे के बाद पापा जी जाग गए और टार्च मार के देखे तो बोल पड़े की आज तो सोना हराम हो गया है। मै भी जाग गया बोला अब क्या हुआ बोले देख यहाँ भी गए है खून चूसने के लिए खटमल दादा। मैंने बोला ये तो ताज्जुब है की लाखो की संख्या में खटमल यहाँ भी आ गए है। इनकी क्या विरादरी है। तब बडके पापा बोले की एक आदमी का खून चूसते चूसते ये खटमल ऊब जाते है । वैसे भी जितने भी पशु पक्षी जीव जंतु इस प्रथ्वी पर है। सब मानव से ज्यादा बुद्धिमान होते है। ये अपने पूर्व जन्म के बारे में भी जानते है इतना भी नही ये आपस में बातें भी करते है और इंसान की भाषा भी समझत है। लेकिन इंसान इनकी भाषा नही समझता है। और इंसान की तरह ये भी सवादी होते है। ऐसे होती है खटमल की विरादरी॥

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--- संजय सेन सागर

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