Wednesday, November 11, 2009

रोती हिन्दुस्तान की हिन्दी॥

खड़ी गम के चौराहे पर॥
रोती हिन्दुस्तान की हिन्दी॥
जिससे सब प्रेम करते ॥
है मेरे देश की बिंदी॥
मिला है संविधान में रूतवा॥
दिए है बद बड़के विशेषक॥
सजाया है स्वरों से जिसको॥
लिखे है लेख प्यारे लेखक॥
बोलने में अब थप्पड़ पड़ जाते॥
गोलियों से भूने जाते है॥
उनसे अब अपील है ॥
जो हिन्दी से नफ़रत करते है॥
छोड़ कर भारत चले जाए॥
दिल लगा ले मिन्नी से॥

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