Tuesday, November 3, 2009

बदनामी होगी..

ऐसे न चाल चल पवन हरजाई॥
लागल झुलानिया कय तार टूट जायी॥
सासू बोली बोले ससुरा बोली बोले॥
ननदी के भैया बगीचा में डोले॥
धीरे धीरे झटका दे आवे अंगडाई॥
लागल नजरिया से बाण छूट जायी॥
आस पड़ोस के बोले टिपोसी॥
कहत निकम्मी बा हमरी पड़ोसी॥
हंस हंस के न बात कर होय जग हसाई॥
लागल उमारिया कय ले छूट जायी॥

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--- संजय सेन सागर

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