Monday, October 19, 2009

आनंद मय था यह दीप का दिन॥

हमने भी दीपकों की लव में थोडा उजाला देखा॥ उस उजाले में अपने पडोसियों की शान्ति और मधुर वाणी सूना॥ उस उजाले में मई भी अपनी कल्पनाओं की खुसिया देखा॥ बहुत ही शांत और उल्लाश भरा था वह दिन॥ कोई किसी को अपशव्द नही बोला॥ बहुत ही आनंद मय था यह दीप का दिन॥

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--- संजय सेन सागर

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