Friday, October 9, 2009

एक बैंक माँ के दूध का


एक बैंक माँ के दूध का

माँ का दूध पिया है तो सामने आ !यह जाना पहचाना सा फ़िल्मी डायलोग माँ के दूध की महत्ता कितनी सादगी से बया कर देता है !बच्चे के जन्म के कुछ ही घंटो में माँ का आंचल दूध से भीगने लगता है !उन बच्चो की किस्मत में कुदरत का यह अनुपम उपहार नही होता जिनकी माये किसी बीमारी या अक्षमता के कारन उन्हें दूध नही पिला पाती! ऐसे ही बच्चो के लिए मुंबई के लोकमान्य तिलक मेडिकल कोलेज की तत्कालीन डीन डॉक्टर अर्मिदा फर्नान्डीज़ ने जनवरी १९९० में अपनी तरह का देश का पहला मानव दूध बैंक खोला ! विनम्रता,सादगी व गरिमा की जीती जगती मिशाल डॉ० अर्मिदा कर्नाटक की निवासी है !उनकी सिक्षा भी वही पूरी हुई !वो कर्नाटक के हुबली कॉलेज से डॉक्टरी की शिक्षा प्राप्त है !डॉ अर्मिदा पढाई के बाद अपने घर धारवाड़ वापस जाना चाहती थी !लेकिन तभी उनकी मुलाकात उनके सहपाठी डॉ फर्नान्डीज़ से हो गयी डॉ फर्नान्डीज़ ने उन्हें अपनी जीवन संगिनी बनने व मिलजुल कर मुंबई के जरूरतमंद लोगो के लिए काम करने के लिए राजी कर लिया !१९९० में उन्होंने देश का पहला व एकमात्र दूध बैंक शुरू किया !उन्हें लोगो को यह समझने में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा की माँ का दूध भी स्टोर किया जा सकता है !ओ़र इससे वंचित जरूरत मंद बच्चो को प्रकीर्त के सर्वोत्तम उपहार से नवाजा जा सकता है.! बर्ष २००१ में इन्होने सेवानिवृति के बाद स्नेहा नामक संस्था की स्थापना की !एशिया की सबसे बड़ी झोपेद्पत्ति बस्ती कहे जाने वाले धारावी में सक्रीय है !यह संस्था बेसहारा महिलावो के लिए काम कर रही है !डॉ अर्मिदा का मानना है की घरेलू हिंशा की शिकार महिलावो का अस्पताल में इलाज भले ही हो जाये पर उन्हें भावनात्मक सहारा नही मिलता !फिर हार कर उनको उसी जगह जाना होता है जंहा उनका उत्पीडन हुआ होता है !स्नेहा ऐसे लोगो को आस्थाई सहारा देती है !वो बताती है की बच्चो के जन्म ,स्वास्थ्य सम्बन्धी अन्य जरुरतो की पूर्ति कर लिए संस्था कोशिस करती है !गरीब कामकाजी महिलावो के बच्चो की देखभाल के लिए ब्यवस्था की गयी है.उनके लिए पोअष्टिक दूध की ब्यवस्था है .स्नेहा ऐड्स रोगिवो कुष्ठ रोगियों के लिए भी काम कर रही है !

3 comments:

  1. दिलचस्प विवरण,संवेदनशील एवं विचारोत्तेजक रचना। बधाई।

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  2. बहुत सारी बधाई आपको भाई साहब .आपने हमारा मान बढाया .

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  3. इस लेख को पढ़कर अपार संतुष्टि हुई ,इस नेक कार्य की जितनी सराहना की जाए कम है . लोगो की परेशानियों का हल हर की वश की बात नहीं ,ख़ुशी होती है ऐसे कदम देख .अद्भुत .

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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