Wednesday, October 7, 2009

आज की बात


कुछ लोग यू ही हमसे खफा है

हर एक से अपनी भी तबियत नही मिलती

देखा था जिसे हमने कोई ऊर था शायद

वो कूँ है जिससे मेरी सूरत नही मिलती

हस्ते हुए चेहरों से है बाज़ार की

जीनत रोने को यंहा वैसे भी फुर्सत नही मिलती

कुंवर समीर शाही

1 comment:

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...