Wednesday, October 21, 2009

अत्याचारी का अंत होगा..

हे प्रभा तुम बनो भयानक॥
नदिया दल दल बन जायेगी॥
पवन प्रलय कर देगी पल को॥
रितुये चिता जलायेगी॥
अब बचेगा न वह अत्याचारी॥
तब नगर बधू मंगल गायेगी॥
महाकाल लीलेगा उसको॥
पटक शिला पर फाड़े गा टांग॥
तब कोयल मधुर गीत बोलेगी॥
डरे हुए मानव अब जाग॥
गया अधर्मी छोड़ धरा को॥
नगर में पुरुवा फ़िर डोलेगी॥

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--- संजय सेन सागर

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