Thursday, October 29, 2009

पागल हो जाइब ..

लागल पगलाय जाइब॥
आवे नाही निंदिया॥
घायल बनाय देहली॥
तोहरी सुरातिया॥
जब तू लगावलू ॥
अंखिया मा कजरा॥
टुकुर-टुकुर देखला॥
उपरा से बदरा॥
झम-झम बाजेला॥
पायलिया से बिछिया॥
लागल पगलाय जाइब॥
आवे नाही निंदिया॥
जब तू हसलू तो ॥
झरे लागल मोटी॥
बड़ी हमके नीक लागे॥
लम्बी लम्बी चोटी॥
नइखे लागल मनवा हमरा॥
सूनी लागे सेजिया॥
लागल पगलाय जाइब॥
आवे नाही निंदिया॥

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