Saturday, October 24, 2009

जवानी के आग..

सुबह -सुबह बगिया मा॥
चुगत रहली फूल॥
हंस के माली बोल पडा॥
हमारा का कसूर॥
जब जवानी के पल्लू॥
पे दाग लाग जायी।
अधरा से तोहरे ॥
गिरेला ला मिठाई॥
सोयी जवानी के॥
आस जाग जायी॥
जियरा मा काहे ॥
जगौलू सुरूर॥
लागल जवानी मा ॥
आग लाग जायी..

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--- संजय सेन सागर

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