Monday, October 26, 2009

अजनबी

एक अजनबी का प्यार ॥
हमें लूटा बहार बन के॥
अब आती है याद उसकी॥
चुभता कतार बन के॥
वह नाम न बताया॥
पचान न बताया॥
आँखों में मेरे समाया॥
कुछ मैंने न समझाया ॥
खो गया कहा पे॥
मेरे दिल का यार बन के॥

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--- संजय सेन सागर

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