Saturday, September 12, 2009

sanskaar

घ्णा करना हमारी सभ्यता में नही आता॥
घ्रणित व्यक्ति का निरादर करना॥
हमारे संस्कार की निशानी है॥
सही बात हमेशा सीधे बोली जाती है॥
बुरी बात बोलने के लिए समय रूक जाता है॥
पर सच्चाई कदुई लगाती है॥
पर बुरी बात कलयुग की है॥
चमचागिरी से स्टार ऊंचा हो सकता है। पर चमत्कारी नही ॥
चमचागिरी चन्द दिनों की होती है...
कर्ताव्यनिष्ट उससे बलवान होता है...

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--- संजय सेन सागर

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