Wednesday, September 23, 2009

लो क सं घ र्ष !: या आंखों को दे दो भाषा....


सागर को संयम दे दो,
या पूरी कर दो आशा
भाषा को आँखें दे दो,
या आंखों को दे दो भाषा

तम तोम बहुत गहरा है,
उसमें कोमलता भर दो
या फिर प्रकाश कर में,
थोडी श्यामलता भर दो

अति दीन हीन सी काया,
संबंधो की होती जाए
काया को कंचन कर दो,
परिरम्भ लुटाती जाए

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल "राही"

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...