Friday, September 4, 2009

आत्महत्या..

मिट्टी के भाव .अपनी जिंदगी गवा रहे है॥
इस पवित्र पावन धरती से रूठ के जा रहे है॥
क्यो करते है आत्म ह्त्या क्या जीने का हक़ नही है॥
मरने के बाद जीने की तरकीब बता रहे है...
संघर्ष ही जीवन है जीना ही चाहिए॥
जीने के साथ गम को पीना ही चाहिए॥
हार मान लेना बुध्मानी नही॥
असफल हो जाना बदनामी नही॥
जाने के बाद आने का रास्ता दिखा रहे है॥

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--- संजय सेन सागर

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