Thursday, September 24, 2009

मन उदास था॥

मन उदास था॥
दिल तम-तमाने लगा॥
बीती बातें याद करके॥
वही गीत गाने लगा॥
आँख से अश्रु झरने लगे॥
उदाशी फ़िर से आ गई॥
खिड़कियों से देख कर वह॥
लगता है मुस्का गयी॥
उसकी करतूत पर ॥
मन नाराज़ नही होता॥
थोड़े वक्त के लिए ॥
शायद मुझे तरसा गई॥
मै टूट चुका वह न टूटी॥
मै रूठ गया वह न रूठी॥
मन करता है तोडू बन्दन॥
लेकिन वह मज़बूत बंधा है॥
रूठे हुए मन को देख ॥
वह मुझको फ़िर चिढाने लगी॥

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--- संजय सेन सागर