Friday, September 25, 2009

श्रीराम चंद्र फ़िर आयेगे॥

दशकंधर का वध कराने॥
श्रीराम चंद्र फ़िर आयेगे॥
अत्याचारी रावन की लंका॥
बजरंगवली जलायेगे॥
अंहकार की बसी भावना॥
अत्याचारी के रग रग में है॥
पाप अधर्म होते है हरदम॥
वैमनुष्यता कण कण में है॥
बंधक बने सही मानव जो॥
उनको मुक्ति दिलाये गे॥

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...