Sunday, September 6, 2009

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:।हिन्दी भावानुवाद द्वारा ..... प्रो. सी. बी. श्रीवास्तव विदग्ध

गणपति वंदन

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:।
निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ: हे गणेश जी! आप महाकाय हैं। आपकी सूंड वक्र है। आपके शरीर से करोडों सूर्यो का तेज निकलता है। आपसे प्रार्थना है कि आप मेरे सारे कार्य निर्विध्न पूरे करें।
विधि: घर से बाहर निकलते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
लाभ: जिस कार्य के लिए घर से निकलते हैं, वह पूरा होता है और यश मिलता है।

हिन्दी भावानुवाद

द्वारा ..... प्रो. सी. बी. श्रीवास्तव विदग्ध

सूर्य दीप्ति से प्रभामय , वक्रशुण्ड गणराज
बाधा विघ्न विनाश प्रभु, सफल करो सब काज

2 comments:

  1. very nice, mai Ganpati Bappa Ke Bhakt ho, or muze Bhagwan Ganeshpar Pura vishwas hai

    Pragati Phadte

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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