Saturday, September 12, 2009

पी करके जीता हूँ॥

अब तपन सताती है॥
मै आंसू पीता हूँ॥
तेरी याद में हरदम जानू॥
मै मर के जीता हूँ॥
क्या टूट गए वे बंधन॥
जो बांधा था मन्दिर में॥
क्या याद नही आती॥
जो स्वप्न सजाया था दिल में॥
लोगो के ताना सुन कर ॥
मै रोज़ पीता हूँ॥
तभी तो तेरी याद में पी करके जीता हूँ॥

2 comments:

  1. पी कर जियो या जी कर पियो कुछ लोग यहाँ पर ऐसे हैं जिन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है

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--- संजय सेन सागर

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