Saturday, September 26, 2009

बरसात तो हो जायेगी॥

दो दिल जहा मिलेगे॥
बरसात तो हो जायेगी॥
पहली ही मुलाक़ात में॥
कुछ बात तो बन जायेगी॥
सताएगी याद प्रिये की ॥
तडपाये गी तन्हाईया॥
चेहरा दिखाई देगा॥
मन भाएगी परछाईया॥
फ़िर भी मिलेगे छुप कर॥
मंजिल नजर आएगी॥
...................................
दिल से दिल मिलेगा॥
नज़ारे कहेगी बातें॥
धड़कन बढेगी दिल की॥
आती रहेगी यादे॥
चुडियो की खनखनाहट॥
कानो को धुन सुनाये गी॥
...................................
सच्चे है दोनों दिल के
पक्के बने पुजारी॥
तू है मेरी मंजिल ॥
मै हूँ तेरा आटारी॥
सोते हुए सपने में॥
तस्वीर नज़र आएगी॥

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर विचार हैं।
    -----
    दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    ( Treasurer-S. T. )

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  2. आप को भी... अर्शिया जी..

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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