Thursday, August 6, 2009

प्रीतम की प्रीत..

हर किसी के दिल के अन्दर॥
प्रियतम की कूक सुनाई देती॥
हर किसी के आँखों में ढल के॥
प्रियतम की प्रीत दिखाई देती॥
सुहाना लगता है सफर ॥
जब सांझ को साजन मिले॥
चेहरे से चेहरा को देखे॥
होठो में मुस्कान लिए॥
उनकी बोली से मोती निकले॥
मीठी बातें हंसे देती॥
हर किसी के आँखों में ढल के॥प्रियतम की प्रीत दिखाई देती॥
झिर-झिर पवन हिलोरे॥
सावन रिम-झिम हस हस बोले॥
चिडिया चूचू गीत सुनावत॥
मन की बगिया आनंद लुटावत॥
अकेले मिल कर धीरे से हंस कर॥
मन की बातिया बाते देती॥
हर किसी के आँखों में ढल के॥प्रियतम की प्रीत दिखाई देती॥

4 comments:

  1. एक खुब्सूरत रचना ......बधाई

    ReplyDelete
  2. achchhe bhaav ,par kavy-kala kaa bhee dhyaan rakhen.

    ReplyDelete
  3. sir ,,agar kahi bachche se galati hoti hai , to aap bataay ki yahaa par galati hai , mai sudharane ki koshish jarur karoogaa......

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...