Thursday, August 13, 2009

गीतिका: नर्मदा -आचार्य सन्जीव' सलिल'

सारांश यहाँ
गीतिका

आचार्य संजीव 'सलिल'



साधना हो सफल नर्मदा- नर्मदा.
वंदना हो विमल नर्मदा-नर्मदा.

संकटों से न हारें, लडें,जीत लें.
प्रार्थना हो प्रबल नर्मदा-नर्मदा.

नाद अनहद गुंजाती चपल हर लहर.
नृत्यरत हर भंवर नर्मदा-नर्मदा.

धीर धर पीर हर लें गले से लगा.
रख मनोबल अटल नर्मदा-नर्मदा.

मोहिनी दीप्ति, आभा मनोरम नवल.
नाद निर्मल नवल नर्मदा-नर्मदा.

सिर कटाते समर में झुकाते नहीं.
शौर्य-अर्णव अटल नर्मदा-नर्मदा.

सतपुडा विन्ध्य मेकल सनातन शिखर
सोन जुहिला सजल नर्मदा-नर्मदा.

आस्था हो शिला, मित्रता हो 'सलिल'.
प्रीत-बंधन तरल नर्मदा-नर्मदा.

* * * * *

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--- संजय सेन सागर

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