Wednesday, August 5, 2009

रक्षा बंधन के दोहे:

रक्षा बंधन के दोहे:

चित-पट दो पर एक है, दोनों का अस्तित्व.
भाई-बहिन अद्वैत का, लिए द्वैत में तत्व..
***
दो तन पर मन एक हैं, सुख-दुःख भी हैं एक.
यह फिसले तो वह 'सलिल', सार्थक हो बन टेक..
***
यह सलिला है वह सलिल, नेह नर्मदा धार.
इसकी नौका पार हो, पा उसकी पतवार..
***
यह उसकी रक्षा करे, वह इस पर दे जान.
'सलिल' स्नेह' को स्नेह दे, कर दे जान निसार..
***
शन्नो पूजा निर्मला, अजित दिशा मिल साथ.
संगीता मंजू सदा, रहें उठाये माथ.
****
दोहा राखी बाँधिए, हिन्दयुग्म के हाथ.
सब को दोहा सिद्ध हो, विनय 'सलिल' की नाथ..
***
राखी की साखी यही, संबंधों का मूल.
'सलिल' स्नेह-विश्वास है, शंका कर निर्मूल..
***
सावन मन भावन लगे, लाये बरखा मीत.
रक्षा बंधन-कजलियाँ, बाँटें सबको प्रीत..
*******
मन से मन का मेल ही, राखी का त्यौहार.
मिले स्नेह को स्नेह का, नित स्नेहिल उपहार..
*******
निधि ऋतु सुषमा अनन्या, करें अर्चना नित्य.
बढे भाई के नेह नित, वर दो यही अनित्य..
*******
आकांक्षा हर भाई की, मिले बहिन का प्यार.
राखी सजे कलाई पर, खुशियाँ मिलें अपार..
*******
गीता देती ज्ञान यह, कर्म न करना भूल.
स्वार्थरहित संबंध ही, है हर सुख का मूल..
*******
मेघ भाई धरती बहिन, मना रहे त्यौहार.
वर्षा का इसने दिया. है उसको उपहार..
*******
हम शिल्पी साहित्य के, रखें स्नेह-संबंध.
हिंदी-हित का हो नहीं, 'सलिल' भंग अनुबंध..
*******
राखी पर मत कीजिये, स्वार्थ-सिद्धि व्यापार.
बाँध- बँधाकर बसायें, 'सलिल' स्नेह संसार..
******
भैया-बहिना सूर्य-शशि, होकर भिन्न अभिन्न.
'सलिल' रहें दोनों सुखी, कभी न हों वे खिन्न..
*******

2 comments:

  1. आपकी पेशकश बहुत सुन्दर है
    ---
    'विज्ञान' पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...