Monday, August 31, 2009

पता नही रूक ज़ाता हूँ...

करता कोशिश मेरा दिल जब॥
तेरे दिल से भिड़ने को॥
पता नही क्यो रूक ज़ाता है..
नैना तुमसे मिलने को॥
पथ पर तेरे चल कर आया॥
सात जनम तक रहने को॥
पता नही क्यो पर रूक ज़ाता है॥
संग संग तेरे चलने को...
व्याकुल होता बहुरंगी मन॥
पास तुम्हारे आने को॥
पता नही क्यो दिल नही कहता॥
तुमको राज़ बताने को॥
दिल तो धक् धक् कर जाता है॥
तेरे संग मचलाने को॥
पता नही क्यो रूक ज़ाता है॥
पास तुम्हारे आने को॥
रात को सपना बुन लेता हूँ॥
तुमसे प्रीत लगाने को॥
पता नही क्यो कह नही पाता॥
मन की बात बताने को॥

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...