Friday, August 21, 2009

धीरे धीरे कनवा म प्रेम रस घोले रे॥

बादल कड़के बिजली चमके॥
मेघा तिव तिव बोले रे॥
आधी रात के सेज के उपरा ॥
पवन आय झकझोरे रे॥
धीरे धीरे कनवा म प्रेम रस घोले रे॥
पानी बरषे बादल बरषे ॥
नदिया हिलोरे रे॥
पापी papihaa जुएनव जूनी॥
piv पिव बोले रे॥
धीरे धीरे कनवा म प्रेम रस घोले रे॥
अचरा उडे चदरा उडे॥
मौसम बोली बोले रे॥
रतिया म बदरा ॥
देहिया टटोले रे॥
धीरे धीरे कनवा म प्रेम रस घोले रे॥

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--- संजय सेन सागर

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