Friday, August 14, 2009

लो क सं घ र्ष !: यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष



बगुले
मोती चुने, गिद्ध कौऐ बादाम चबाये रहे।
राजहंस दाने को तरसे, गधे कलाकंद खाय रहे ॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
सत्य हरिश्चंद रिक्शा खीचें, लखनऊ और कलकत्ता में।
हत्यारे, माफिया ,गिरहकट , चोर लुटेरे सत्ता में॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
अपराधी , नेता, डकैत,मिल बना रहे गठबंधन ।
धूर्त ,दलाल , स्वार्थी चमचे, करते वंदन अभिनन्दन॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
नेता बहुरूपिये दिखावें , चमत्कार नित खेल खेल में।
अरबो का घोटाला कर, घुमैं जहाज मुफ्त रेल में॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
निरपराधी सडैं जेल में, अपराधी मंत्रालय में।
पीडितो को गुंडे बलशाली, धमकावें न्यायलय में॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
परदादा का था कत्ल हुआ, लड़ रहा मुकदमा परपोता।
हत्यारे स्वर्ग सिधार गए, अब बैठ के बुद्धू क्या रोता ॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
सदाचार पर भाषण देते, माथा टेक शिवालय में।
नशा निवारण मंत्री जी की, रात कटे मदिरालय में ॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
शोषण , बेकारी ,मँहगाई , बस- ट्रेन डकैती घोटाले।
हिंसक प्रदर्शन आगजनी , विस्फोट से जीवन के लाले॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
लाखो भूखे नंगे बच्चे, सोते है फुटपाथों पर ।
ठिठुर-ठिठुर सर्दी से मरना, लिखा है उनके माथो पर॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥
बिजली के दर्शन हुए नही, लाखो गावों विद्यालय में ।
पर ए .सी चलती झमाझम , मंत्री जी के शौचालय में॥
यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है ॥

-मोहम्मद जमील शास्त्री

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