Saturday, August 29, 2009

जिंदा रहने की हमको अब चाहत नही.......

जिंदा रहने की हमको अब ...
............चाहत नही.............
जिंदगी ऊब करके ....
........कफ़न दे गयी.........
उसके पल्लू में बंधकरके जायेगे..हम
प्यार की गाँठ जीवन की कब खुल गयी....
याद आयेगे हम तो दुआ मांग लेना॥
हंस के खुशिया का तोह्पा दे जायेगे हम...
बहते बहते न जाने किस धार में...
तेरी जीवन की लयदूसरी मिल गयी...
धोखा खाने के काबिल तो हम थे नही॥
ठीक है जो हुआ भूल जाना उन्हें॥
अपना जीवन सजा के रख लेना तुम॥
तेरे जीवन की दूजी कड़ी दिख गयी॥

3 comments:

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--- संजय सेन सागर

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