Thursday, August 6, 2009

तेरी दीवानी..

हे साजन तेरे सुहाग में॥
कैसा क्या हूर है॥
जिससे सवार कर मई॥
तेरी दीवानी हो गई॥
तेरी बंदगी को याद कर॥
मई तेरी रानी बन गई॥
तेरे जीवन की प्राण प्रिये॥
राज धानी हो गई॥
जिसमे मचल कर जान मेरी॥
तुम बगिया सजाओ गे॥
उस नव युग की शान के लिए॥
एक नया घर बनाओ गे॥
ऐसी चली बया जो ॥
न जाने कब जवानी चढ़ गई...
हे साजन तेरे सुहाग में॥
कैसा क्या हूर है॥
जिससे सवार कर मई॥
तेरी दीवानी हो गई॥
तेरी बंदगी को याद कर॥
मई तेरी रानी बन गई॥
तेरे जीवन की प्राण प्रिये॥
राज धानी हो गई॥

3 comments:

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--- संजय सेन सागर

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