Wednesday, July 22, 2009

ये देश है मेरा...?

अपनी पिछली पोस्ट में मैंने लिखा था की हमें बेवजह विदेशियों के लिए पलकें पावडे नहीं बिछाना चाहिए !और लो उन्होंने साबित भी कर दिया..!एक विदेशी एयर लाइन ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ जो सलूक किया वो हर भारतीय के लिए शर्मनाक है !ऊपर से तुर्रा ये की हम..सब.... से बराबरी का व्यहवार करते है,तो क्या जनाब ओबामा के साथ भी ऐसे,लेकिन अफ़सोस तब नहीं !क्योंकि भारतियों को अपमान सहने की आदत सी हो गई है ना !पहले तो वे अपने अपने देशों में अपमानित करते थे ,अब हमारे देश में भी वे हमारा अपमान करेंगे..!क्या एयर लाइन को विशिष्ट अतिथियों की गाइड लाइन का पता नही?क्या वे पूर्व राष्ट्रपति को जानते नही?क्या सुरक्षा के नाम पर जूते उतरवाए जाते है?साफ़ है की उनका मकसद अपमानित करना ही था...!और हम है की रत लगा राखी है...पधारो म्हारे देश ....!आओ हमारा अपमान करो,बीमारियाँ .फैलाओ...हमें बुरा नहीं लगता..! हमारे देश के नेता बहुत उदार है ,उनकी मोटी चमडी पर कुछ असर नहीं होता..!इसीलिए कभी कुछ नहीं होता !कभी जोर्ज फर्नांडिस तो कभी प्रणब मुखर्जी को जांच के नाम पर कपड़े उतारने पड़ते है..!कभी भी विदेशी नेताओं से हम ऐसा करने की हिमाकत कर सकते है?शायद नहीं.....!हर विदेशी चीज़ को भाग कर अपनाने वाले क्या अपमान करना भी अपना पायेंगे? नहीं...क्यूंकि हम तो अपमान सहना जानते है करना नहीं.....!

1 comment:

  1. विदेशी भाषा , विदेशी लोग ...क्या देश आजाद हुआ है या गोरे अंग्रेजो की गुलामी से निकल कर स्वाभिमान हीन देशी अंग्रेजो की गुलामी मे ही है

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--- संजय सेन सागर

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