Friday, July 17, 2009

सच का सामना...

सच की पोल जो खोले गे॥
जीवन की धार हमास जायेगी॥
प्रेम रूप की जो नौका है॥
मजधार में आके रूक जायेगी॥
लयप्रलय भी सकती है॥
बाढ़ तो पक्का आ जायेगी॥
कड़वाहट की बूंदे टपके गी॥
उथल पुथल सी मच जायेगी॥
छत्ते पे ईट जब मारेगे॥
मधुमक्खी जिंदा खा जायेगी॥

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--- संजय सेन सागर

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