Saturday, July 11, 2009

बाल गीत पारुल संजीव 'सलिल'

बाल गीत

पारुल

संजीव 'सलिल'

रुन-झुन करती आयी पारुल.

सब बच्चों को भायी पारुल.

बादल गरजे, तनिक न सहमी.

बरखा लख मुस्कायी पारुल.

चम-चम बिजली दूर गिरी तो,

उछल-कूद हर्षायी पारुल.

गिरी-उठी, पानी में भीगी.

सखियों सहित नहायी पारुल.

मैया ने जब डांट दिया तो-

मचल-रूठ-गुस्सायी पारुल.

छप-छप खेले, ता-ता थैया.

मेंढक के संग धायी पारुल.

'सलिल' धार से भर-भर अंजुरी.

भिगा-भीग मस्तायी पारुल.

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