Thursday, June 4, 2009

एक मुक्तक : आचार्य संजीव 'सलिल'

देश इष्ट ईमान धर्म रब गॉड खुदा ईश्वर है अपना।

पथ पग पथिक लक्ष्य साधन यह साध्य साधना सच औ' सपना।।

श्वास-आस परिहास हर्ष दुःख मिलन-विरह वात्सल्य भक्ति भी-

देश-प्रेम को नाप सके जो बना न 'सलिल' जगत में नपना ।।

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--- संजय सेन सागर

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