Saturday, June 27, 2009

लो क सं घ र्ष !: संघी कारसेवको से कांग्रेस को बचाएँ राहुल -2

वास्तव में कांग्रेस में अपना आशियाना बनाकर आगे अपनी पार्टी को शक्ति एवं उर्जा देने की भाजपा की परम्परा रही है। वर्ष 1980 में जब उस ज़माने के कांग्रेसी युवराज संजय गाँधी के अनुभवहीन कंधो की सवारी करके कांग्रेस अपनी वापसी कर रही थी और दोहरी सदाशयता का दंश झेल रहे भाज्पैयो को अपनी डूबती नैय्या के उबरने का कोई रास्ता नही सूझ रहा था तो संजय गाँधी द्वारा बने जा रही युवक कांग्रेस में अपने कार्यकर्ताओ को गुप्त निर्देश भाजपा के थिंक टैंक आर.एस.एस के दिग्गजों द्वारा देकर उन्हें कांग्रेस में दाखिल होने की हरी झंडी दी गई। परिणाम स्वरूप आर.एस.एस के नवयुवक काली टोपी उतार कर सफ़ेद टोपी धारण कर लाखो की संख्या में दाखिल हो गए। कांग्रेस तो अपने पतन से उदय की ओर चल पड़ी , मगर कांग्रेस के अन्दर छुपे आर.एस.एस के कारसेवक अपना काम करते रहे और इन्हे निर्देश इनके आकाओं से बराबर मिलता रहा । यह काम आर.एस.एस ने इतनी चतुराई से किया की राजनीती चतुर खिलाडी और राजनितिक दुदार्शिता की अचूक सुझबुझ रखने वाली तथा अपने शत्रुवो पर सदैव आक्रामक प्रहार करने वाली इंदिरा गाँधी भी अपने घर के अन्दर छुपे इन भितार्घतियो को पहचान न सकी। इसका एक मुख्य कारण उनका पुत्रमोह भी था परन्तु संजय गाँधी के एक हवाई हादसे में मृत्यु के पश्चात इंदिरा गाँधी ने जब युवक कांग्रेस की सुधि ली और उसके क्रिया कलापों की पर गहरी नजर डाली तो उन्हें इस बात का अनुमान लगा की कही दाल में काला जरूर है । बताते है की इंदिरा गाँधी युवक कांग्रेस की स्क्रीनिंग करने की योजना बनाकर उस पर अमल करने ही वाली थी की उनकी हत्या १९८४ में उन्ही के सुरक्षागार्ङों द्वारा करा दी गई । उसके बाद हिंसा का जो तांडव दिल्ली से लेकर कानपूर व उत्तर प्रदेश के कई नगरो में सिक्ख समुदाय के विरूद्व हुआ उसमें यह साफ़ साबित हो गया की आर.एस.एस अपने मंसुबू पर कितनी कामयाबी के साथ काम कर रही है। राजीव गाँधी ,जो अपने भाई संजय की अकश्मित मौत के पश्चात बेमन से राजनीती में अपनी मान की इच्छा का पालन करने आए थे, जब तक कुछ समझ पाते हजारो सिक्खों की लाशें बिछ चुकी थी करोङो की उनकी संपत्ति या तो स्वाहा की जा चुकी थी या लूटी जा चुकी थी । लोगो ने अपनी आंखों से हिन्दुत्ववादी शक्तियों को कांग्रेसियों के भेष में हिंसा करते देखा , जिन्हें बाकायदा दिशा निर्देश देकर उनके आका संचालित कर रहे थे । सिखों को अपने ही देश में अपने ही उन देशवासियों द्वारा इस प्रकार के सुलुक की उम्मीद कभी न थी क्योंकि सिख समुदाय के बारे में टू इतिहास यह बताता है की उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए ही शास्त्र धारण किए थे और विदेशी हमलावरों से लोहा लिया था । देश में जब कभी मुसलमानों के विरूद्व आर.एस.एस द्वारा सांप्रदायिक मानसिकता से उनका नरसंहार किया गया तो सिख समुदाय को मार्शल फोर्स के तौर पर प्रयुक्त भी किया गया ।

राजीव गाँधी ने अपने शांतिपूर्ण एवं शालीन स्वभाव से हिंसा पर नियंत्रण तो कर लिया परन्तु एक समुदाय को लंबे समय के लिए कांग्रेस से दूर करने के अपने मंसूबो को बड़ी ही कामयाबी के साथ आर.एस.एस अंजाम दे चुकी थी । देश में अराजकता का माहौल बनने में अहम् भूमिका निभाने वाले आर.एस.एस के लोगो ने अब अवसर को उचित जान कर उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश व राजस्थान को अपना लक्ष्य बना कर वहां साम्प्रदायिकता का विष घोलना शुरू किया और धीरे-धीरे इन प्रदेशो में मौजूद कांग्रेसी हुकुमतो को धराशाई करना भी शुरू कर दिया।

फिर राजीव गाँधी से एक भूल हो गई वह यह की 1989 में नारायण दत्त तिवारी ने उन्हें यह सलाह दी की हिंदू भावनाओ को ध्यान में रखते हुए अयोध्या से ही लोकसभा चुनाव की मुहीम का गाज किया जाए और भाजपा व विश्व हिंदू परिषद् के हाथ से राम मन्दिर की बागडोर छीन कर मन्दिर का शिलान्याश विवादित परिषर के बहार करा दिया जाए। यह सलाह आर.एस.एस ने अपनी सोची समझी राद्निती के तहत कांग्रेस के अन्दर बैठे अपने कारसेवको के जरिये ही राजीव गाँधी के दिमाग में ङलवाई थी । नतीजा इसका उल्टा हुआ , 1989 के आम लोकसभा चुनाव में कांग्रेस न केवल उत्तर प्रदेश में चारो खाने चित्त हुई बल्कि पूरे उत्तर भारत, मध्य भारत, राजस्थान व गुजरात में उसकी सत्ता डोल गई और भाजपा के हिंदुत्व का शंखनाद पूरे देश में होने लगा । अपने पक्ष में बने माहौल से उत्साहित होकर लाल कृष्ण अडवानी जी सोमनाथ से एक रथ पर सवार होकर हिंदुत्व की अलख पूरे देश में जगाने निकल पड़े। अयोध्या तक तो वह न पहुँच पाये, इससे पहले ही बिहार में उनको गिरफ्तार कर लालू, जो उस समय बिहार के मुख्यमंत्री थे, ने उन्हें एक गेस्ट हाउस में नजरबन्द कर दिया । उधर अडवानी जी की गिरफ्तारी से उत्तेजित हिन्दुत्ववादी शक्तियों ने पूरे देश में महौल गर्म कर साम्प्रदायिकता का जहर खूब बढ़-चढ़ कर घोल डाला , इस कार्य में उन्हें भरपूर समर्थन उत्तर प्रदेश में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सहाबुद्दीन , इलियाश अहमद आजमी व मौलाना अब्दुल्ला बुखारी जैसे कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं के आग उगलते हुए भासनो से मिला।

क्रमश:
-तारीक खान

1 comment:

  1. dhanya ho , rahul ki shadi bhi kahi ye sengh to nahi rok rahai hai .

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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