Monday, May 4, 2009

Loksangharsha: छवि आ जायेगी



प्यार है ,गीत है, साज है जिंदगी
खुशी गुन से लबरेज है जिंदगी
मानता
हूँ की तू बेवफा है मगर-
फिर
भी तुम पर बहुत नाज है जिंदगी

एक विश्वास का सागर है जिंदगी
आंसुओ
की सुधा धार है जिंदगी
दर्द
की बाँसुरी पर मचलती गजल-
टूटे
सपनो का अभिसार है जिंदगी

रूप की चांदिनी कुछ निखर जायेगी
लालिमा
भी सिमटकर सँवर जायेगी
आप
पलकों का परदा हटायें जरा-
पुतलियों
में मेरी छवि जायेगी

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

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--- संजय सेन सागर

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