Wednesday, May 20, 2009

कभी कोल्डड्रिंक पीने के पैसे नहीं थे बिग बी के पास


किसी ने सच ही कहा है, जिस व्यक्ति ने जीवन में संघर्ष नहीं किया, वो कभी बड़ा नहीं बन सकता और बड़ा बनने के लिए जीवन की छोटी-छोटी चीजों से सीख लेना बहुत जरूरी है। सदी के महानायक यानी अमिताभ बच्चन का जीवन भी कुछ ऐसे ही उतार-चढ़ाव से भरा था।
बिग बी ने अपने ब्लॉग पर अपने जीवन के कुछ अनुभवों के बारे में लिखा है। उन्होंने अपने बचपन के उन दिनों का जिक्र किया है जब उनके पास कोकाकोला पीने के पैसे नहीं होते थे, दोस्तों की बर्थ-डे पार्टी में जाने के लिए अच्छे कपड़े नहीं होते हैं।
अमिताभ ने लिखा कि उनके माता-पिता की आय काफी सीमित थी और उतने ही पैसों में वे अपने बच्चों को पालते थे। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के विज्ञान भवन में हर्बट वोन करांजन ने फिलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रॉ आयोजित हुआ था, मगर वे सिर्फ इसलिए वहां नहीं जा पाए थे क्योंकि उनके पास अच्छे कपड़े नहीं थे और जो कपड़े थे उनको ड्राय क्लीन करवाने के पैसे नहीं थे।
बिग बी ने लिखा है कि उन्हें स्कूल का क्रिकेट क्लब ज्वाइन करना था, लेकिन मां तेजी बच्चन के पास इसके लिए दो रुपए (जी हां मात्र 2 रु.) भी नहीं थे। इससे बिग भी काफी निराश हो गए थे और अपने आसुओं को भी नहीं रोक पाए, लेकिन इस लाचारी को उन्होंने खुद पर हावी नहीं होने दिया।
अमिताभ ने लिखा कि दोस्तों की बर्थ-डे पार्टी में जहां वे साइकल से जाते थे वहीं उनके दोस्त कार पर सवार होते थे। दोस्तों के घर ड्राइंग रूम में जहां एसी लगा हुआ था वहीं अमिताभ का घर साधारण था।
इसके बाद अमिताभ अपने पैरों पर खड़े हुए और माता-पिता को हर वो चीज देना चाही जिसका अभाव उन्होंने जिंदगीभर झेला। मगर उनके माता-पिता को अमिताभ से पैसे और लग्जरी सामान नहीं बल्कि उनकी व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल चाहिए थे, जब वे उनके साथ बैठें और दिनभर की गतिविधियों के बारे में बताएं।
अमिताभ ने अपने प्रशंसको से कहा है कि आज मैं अपने माता-पिता को खो चुका हूं, लेकिन उनकी कमी बेहद खलती है, वे पल हमेशा याद आते हैं। मगर आप में से कितने लोग हैं तो अपने अभिभावकों के साथ बैठकर उनके साथ कुछ पल बताते हैं। उन्हें समय देते हैं।
आज अमिताभ बच्चन के पास करोड़ों की संपत्ति है। घर के प्रत्येक कमरे में एसी है, हर अवसर पर जाने के लिए अलग-अलग कारें हैं और जिस ड्रेस को वे एक बार पहन लेते हों उसको शायद दोबारा हाथ भी न लगाते हों। फिर भी वे अपने शुरुआती दिनों को नहीं भूले हैं। कभी उनके पास कोल्डड्रिंक पीने के पैसे नहीं थे और आज उनके नाम से ही कितनी चीजें बिकती हैं।
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2 comments:

  1. येन -केन प्रकारेण इस मुकाम पर पहुन्च कर कुछ भी कहा जासकता है. ओर सिम्पेथी व महान दिख्ने के लिये । अमिताभ बच्चन के पिता सदैव से ही नेह्ररू खान्दान के नज़दीकी रहे है व अच्छे मध्यम वर्ग से थे । कही हुई बातेन सब बनावटी ही हें। सभी सफ़ल माने जाने वाले लोग इस तरह के शो करते हैं, शो- मेन क्यों नहीं?

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  2. डा० गुप्ता की बात से मै पूर्ण रूप से सहमत हूं, नेहरु खानदान के सबसे करीबी रहे हरिवंश राय बच्चन साहब के लड़के अमिताभ के द्वारा ये कहना कि उनके पास २५ पैसे या २ रुपये भी
    नही होते थे ये बात सरासर बनावटी और सत्य से परे है, शेरवुड स्कूल नैनीताल के पढ़े अमिताभ बच्चन कभी भी इतनी तंगहाली में नही रहे होंगे।
    सीनियर बच्चन यानि कि हरिवंश राय बच्चन को तो शायद राष्ट्र कवि का दर्जा भी प्राप्त हुआ था। और यदि नही भी हुआ था, तो भी उनकी अमर रचना मधुशाला की रायल्टी क्या इस लायक भी नही थी कि जूनियर बच्चन यानि कि अमिताभ को दो रुपये भी देने में सक्षम नही थी??
    कहना डा० गुप्ता का कि इस मुकाम पर पहुंच कर कुछ भी कह देना आसान होता है...
    बाकि ये बात कुछ हजम नही हुई।

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--- संजय सेन सागर

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