Saturday, October 2, 2010

सताता है रुलाता है,पर माँ कहता है

संजय सेन सागर जी हिन्दुस्तान का दर्द के संपादक है और उनकी यह रचना दैनिक भास्कर के ''रसरंग'' में पहले पढने को मिली थी जिसे आज तक संभाल कर रखा था आज आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ,मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की यह नज्म आपके दिल तक पहुंचेगी...
संजय सेन सागर जी ने अपनी उम्र से बहुत ही बड़े काम किये है,उनकी आयु अभी मात्र २० साल है और उन्होंने अभी से ही बह मुकाम हासिल कर लिया है जिसे हासिल करने मे एक लम्बा अर्सा बीत जाता है.
तो आप आनंद लीजिये इस नज्म का और हम कामना करते है की आप सदा माँ के आँचल के तले बने रहें....




वह अब भी मुझे मां कहता है।
सताता हैं रुलाता है
कभी कभी हाथ उठाता है पर
है वह मुझे मां कहता है।


मेरी बहू भी मुझे मां कहती हैं
उस सीढ़ी को देखो,मेरे पैर के
इस जख्म को देखो,
मेरी बहू मुझे
उस सीढ़ी से अक्सर गिराती है।
पर हाँ,वह मुझे मां कहती है।

मेरा छोटू भी बढिया हैं,
जो मुझ को दादी मां कहता है,
सिखाया था ,कभी मां कहना उसको
अब वह मुझे डायन कहता हैं
पर हाँ
कभी कभी गलती सें
वह अब भी मुझे मां कहता है।

मेरी गुड़िया रानी भी हैं ,जो मुझको
दादी मां कहती है
हो गई हैं अब कुछ समझदार
इसलिए बुढ़िया कहती हैं,लेकिन हाँ
वह अब भी मुझे मां कहती है।

यही हैं मेरा छोटा सा संसार
जो रोज गिराता हैं
मेरे आंसू ,रोज रुलाता हैं खून के आंसू
पर मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि वे सभी
मुझे मां कहते है।

46 comments:

  1. bhaut khoob sanjay ji aasha hai aap mere is kadam se khush honge

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  2. जो रोज गिराता हैं
    मेरे आंसू ,रोज रुलाता हैं खून के आंसू
    पर मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि वे सभी
    मुझे मां कहते है।

    vaah! kyaa baat hai...... ati sunder ...aur bhavatmak......thankx
    HAPPY MOTHERs DAY

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  3. संजय जी

    आशीर्वाद देने का मन हो रहा है। इतनी सशक्‍त प्रस्‍तुति की आँख से आँसू निकल आए। माँ का सत्‍य यही हैं। माँ तो बस 16 साल तक ही माँ है। फिर तो एक रिश्‍ते को ढोने का भ्रम है।

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  4. ये कविता दिल को छू गयी संजय जी को बहुत बहुत अशिर्वाद शुभ्काम्नयें और बधाई वो एक दिन जरूर सहित्य के क्षितिज छू लेंगे

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  5. आज की वास्तविकता है , वास्तव मै तो यह सदा से होता आया है,कन्स जैसे भी मां बाप को कैद करने वाले थे ,हां आज अधिकतर यह होता है, पर यह सब अनैतिकता की बातें हें, मां की महिमा कभी कम नहीं होती ।

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  6. bhot hi umda ....wese bhi maa par koi bhi baat buri ho nahi sakti ...or ye to jabki ..itni sundar rachna hai....jai ho

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  7. aajkal maa waqayi isi tarah tadap rahi hai khud ke astitav ko bachane ke liye

    bahut ghari rachna lagi

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  8. आपकी नज़म ...दिल को छू गयी दोस्त
    ये आज के वक़्त की कड़वी सच्चाई है
    माँ ...माँ तो है ..पर औलाद का स्वरुप बदल गया है

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  9. आप लोगों ने इस रचना को पढ़ा मैं आपका शुक्रगुजार हूँ
    सच कहा माँ के ऊपर से कुछ भी लिखो सीधा दिल तक जाता है
    आगे भी आप लोग यहाँ आते रहे यही आग्रह है

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  10. आप लोगों ने इस रचना को पढ़ा मैं आपका शुक्रगुजार हूँ
    सच कहा माँ के ऊपर से कुछ भी लिखो सीधा दिल तक जाता है
    आगे भी आप लोग यहाँ आते रहे यही आग्रह है

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  11. बहुत गहरी रचना ....!१

    साधुवाद .....!!

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  12. boht hi dard bhari kavita hai......

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  13. संजय आज तुम्हारी पोएम पढ़कर लगा की सच तू बढा हो गया
    इतनी बढ़ी और गहरी बात कोई छोटा नहीं कह सकता
    जीते रहो

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  14. संजय आज तुम्हारी पोएम पढ़कर लगा की सच तू बढा हो गया
    इतनी बढ़ी और गहरी बात कोई छोटा नहीं कह सकता
    जीते रहो

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  15. sanjaji
    itni marmsprshi aur itni gahrai liye kavita vah
    maa ke dard ko uski mhanta me smeta hai .bhut badhai aur anekanek ashirwad itni kam umr me ase bhav mai to kayl ho gai tumhari .

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  16. sanjay.........jaise adbhut aap ho vaisi hi to aapki kavita ko bhi hona hogaa....aapne vaakayi bahut hi marmsparshi likh dala hai.....!!

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  17. बहुत बढ़िया!मात्री दिवस की शुभकामनायें! बहुत ही अच्छा लिखा है आपने! माँ हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं! आज माँ की वजह से ही इस दुनिया में कदम रखे हैं!
    आप मेरा ये ब्लॉग परियेगा ! मैंने मात्री दिवस पर लिखा है!
    http://urmi-z-unique.blogspot.com

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  18. sanjay ji ...aap ne bahut hi behtareen rachna likh dali jo dil ko chu gayi...badhai ho

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  19. This comment has been removed by the author.

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  20. संजय .... बहुत हीं बेहतरीन रचना लिख डाली है , तुमने तो ;
    और ख़ुशी ये है कि तुमने भी माँ के दिल को पूरा समझा .... ऐसे हीं माँ का आर्शीवाद तुम्हे मिले ..... और सच कहा तुमने अपनी रचना में .... कुछ ऐसी हीं होती है माँ

    अभिषेक

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  21. अरे भाई सजयजी

    क्या बात है हिन्दुस्थान के दर्द के लेखको को छुटी पर भेज दिया है क्या ? कल से मुख्य पृष्ट पर मॉ के साथ आप बिराज रहे है। भाई लाईन खोलो, लिखने वालो कि लाईन लगी पडी है हिन्दुस्थान के दर्द पर। आपने नेटवर्क जाम कर रखा है। और कभी कभी प्रभु के पास भी आया करो भाई।

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  22. maa sachmuch ishwar hoti hai.
    kavita ke liye badhai.

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  23. आप लोग तक आये सुक्रिया
    मात्व दिवस की आप सभी को बधाई !

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  24. hey prabhu!!
    ji aisi koi baat nahi hai koi kahi nahi gaya hai
    wo to usko sabse upar set kiya hai to baanki ki poest neeche ja rahi hai !
    haan jarur aayenge kyon nahi

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  25. बहुत बढ़िया लिखा है संजय जी..आप इसी तरह आगे बढ़ते जाएँ यही दुआ है !

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  26. बहुत बढ़िया लिखा है संजय जी..आप इसी तरह आगे बढ़ते जाएँ यही दुआ है !

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  27. वाह भाई संजय मजा आया साथ में आंसू

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  28. दोस्त गजब कर दिया तुमने तो रुला ही दिया
    वाह बाह संजय भैया

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  29. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  30. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  31. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  32. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  33. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  34. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  35. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  36. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  37. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  38. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  39. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  40. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  41. बहुत सुन्दर
    बहुत ही बढ़िया

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  42. vo log maha murkh hote hai jo apni maa ko satate hai
    unse pucho jiki maa nahi hoti
    vo jhoote pyar ko taras jaate hai

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  43. AAJ MAA KI STHTI VAKAI YAHI HE SAMAJ ME. LEKIN JIMMEDAR KAUN ? AAO HUM SAB MILKAR SOCHEY .SANJAY BHAI DARD KE SAGAR KO MERA MAMASKAR.ASHOK KHATRI BAYANA RAJASTHAN

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  44. Dil ko chuu dene vaali rachna..bahut-2 badhai..

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  45. तुम सच मै माँ से जुड़े हो दोस्त जिसके दिल का दर्द अपनी बातो से ब्यान कर पाए तुम सच मै एक अच्छे लेखक हो !

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  46. मा तो माँ है माँ जैसी दुनिया में कोई ओर नहीं
    वाह संजय क्या रचना है

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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