Friday, May 1, 2009

मुसलमानों का एहसान माने भाजपा

सलीम अख्तर सिद्दीकी
1984 के लोकसभा में चुनाव भाजपा केवल दो सीटें जीतकर मर चुकी थी। केवल अन्तिम संस्कार शेष था। लेकिन राजीव गांधी की अपरिपक्व मंडली ने हिन्दुओं को खुश करने के लिए फरवरी 1986 में बाबरी मस्जिद पर लगे ताले को खुलवाकर बोतल में बंद जिन्न को बाहर निकाल दिया। ताला खुलने के बाद आखिरी सांसें गिन रही भाजपा को जैसे 'संजीवनी' मिल गयी। लालकृष्ण आडवाणी सहित कल्याण सिंह, साध्वी रितम्भरा, उमा भारती, अशोक सिंहल, विनय कटियार, प्रवीण तोगड़िया और न जाने कितने लोगों ने राम मंदिर को ही अपना एकमात्र मुद्दा बना लिया। गली-गली रामसेवकों की फौजें तैयार हो गयीं। नफरत,घृणा और कत्लोगारद का ऐसा माहौल तैयार किया गया कि हिन्दुस्तान का धर्मनिरपेक्ष ढांचा चरमरा कर रह गया। पूरा प्रदेश साम्प्रदायिक दंगों की आग में झुलसने लगा। नतीजा, 1989 के चुनाव में भाजपा की सीटें दो से बढ़कर 88 हो गयीं। भाजपा ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की जनता दल की सरकार को बाहर से समर्थन दिया। राम मंदिर आंदोलन अपनी गति से चलता रहा। बेकसूर हिन्दू और मुसलमानों का खून पीता रहा। भाजपा रुपी 'ड्राक्यूला' पनपता रहा। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया। इससे भाजपा बौखला गयी। आडवाणी रथ पर सवार होकर रामरथ लेकर यात्रा पर निकल पड़े। उनका रथ जहां-जहां से गुजरा वहां दहशत और नफरत फैलती चली गयी। आखिरकार भारी खून-खराबे के बाद बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने समस्तीपुर में आडवाणी को गिफ्तार किया। राम रथ के घोड़े की लगाम को खींचकर उसे आगे बढ़ने से रोका। भाजपा ने विरोधस्वरुप जनता दल सरकार से समर्थन वापस ले लिया। नतीजे में 1991 में मध्यावधि चुनाव हुए। उत्तर प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन भाजपा की 88 से बढ़कर 120 सीटें हो गयी। भाजपा ने अपनी ताकत बढ़ती देखकर राममंदिर आंदोलन को और ज्यादा तेज कर दिया। आखिरकार वो दिन भी आया, जब रामसेवकों ने पूरे संघ परिवार के संरक्षण में बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया।
1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ताकत बढ़कर 182 हो गयी। भाजपा ने अटल बिहारी के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा पेश किया लेकिन वाजपेयी संसद में बहुमत नहीं जुटा सके लिहाजा मात्र 13 दिन में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 1998 में देश ने फिर से मध्यावधि चुनाव का दंश झेला। भाजपा की सीटें 188 हो गयीं। भाजपा ने फिर से केन्द्र में सरकार बनायी, जो केवल 13 महीने ही चल सकी। एक बार फिर देश पर मध्यावध्चिुनाव का भार पड़ा। 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें नहीं बढ़ सकीं। वह 188 पर ही टिकी रही। तमामतर कोशिशों के बाद भी पूर्ण बहुमत पाने का भाजपा का सपना पूरा नहीं हो सका। 1999 में भाजपा ने राममंदिर, धारा 370 और समान सिविल कोड जैसे मुद्दों को सत्ता की खातिर कूड़े दान में डाल कर यह दिखा दिया कि वह अब सत्ता से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकती। इसमें कोई शक नहीं कि भाजपा को 2 से 188 सीटों तक लाने का श्रेय आडवाणी को ही जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री बनने में उनकी कट्टर छवि उनकी दुश्मन बन गयी। लेकिन भाजपा के पास अटल बिहारी वाजपेयी के रुप में एक 'मुखौटा' मौजूद था। इसी मुखौटे को आगे करके बार-बार के चुनावों से आजिज आ चुके छोटे-बड़े राजनैतिक दलों का समर्थन लेकर गठबंधन सरकार बनायी। भले ही भाजपा ने तीनों मुद्दों को छोड़ दिया हो, लेकिन संघ परिवार ने पर्दे के पीछे से अपना साम्प्रदायिक एजेंडा चलाए रखा।
फरवरी 2002 में नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में जो कुछ किया, वह उसी एजेंडे का हिस्सा था। नरेन्द्र मोदी 'हिन्दू सम्राट' हो गए। अब उन्हें 2014 का 'पीएम इन वेटिंग' बताया जाने लगा है। यह संघ परिवार का नया पैंतरा है। वह क्या संदेश देना चाहता है, इसे समझना मुश्किल नहीं है। संघ परिवार को अब वरुण में दूसरे नरेन्द्र मोदी भी दिखायी देने लगे हैं। भाजपा में जो शख्स दूसरे समुदायों के बारे में जितनी अधिक नफरत भरी बातें करता है, भाजपा में उसका कद उतना ही उंचा हो जाता है। उसे चुनावों में 'स्टार प्रचारक' का दर्जा हासिल हो जाता है। वरुण ने पीलीभीत की एक सभा में मुसलमानों के हाथ काटने की बात की तो नरेन्द्र मोदी के बाद अब वरुण भी भाजपा के स्टार प्रचारक हो गए। लेकिन जनता यह देख चुकी है कि वरुण कितने कमजोर दिल के इंसान हैं। माफी मांग कर जेल से बाहर आए हैं। संघ परिवार में माफी मांगने की परम्परा रही है। अटल बिहारी वाजपेयी ब्रिटिश हुकूमत से माफी मांग कर रिहाई ले चुके हैं। भाजपा के लिए 90 का दशक स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। उस स्वर्णिम काल में भाजपा 188 सीटों से आगे नहीं बढ़ सकी है। अब नरेन्द्र मोदी या वरुण गांधी जैसे स्टार प्रचारक कितने भी गुजरात बनाने या मुसलमानों के हाथ काटने की बात करें, 'भाजपा शाईन' होना मुश्किल ही लगता है। क्या कोई भाजपाई यह बतायेगा कि क्या केवल दूसरे समुदायों के प्रति अनाप-शनाप बोल कर ही वोट हासिल किए जा सकते हैं ? क्या इस देश में मुद्दों का अकाल पड़ गया है ? भाजपा को तो मुसलमानों को एहसानमंद होना चाहिए कि वह उनकी वजह से 'मृत्यू शैया' से उठकर फिर से चलने-फिरने लगी है। मैं तो कभी-कभी यह सोचता हूं कि यदि इस देश में मुसलमान नहीं होते तो भाजपाई तो भूखे ही मर जाते।

6 comments:

  1. आपने इन दोगलों का सही आकलन किया है
    साधुवाद
    श्याम सखा

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  2. achcha drsti kon hai par shayad sabhi ne musalmaano ke shaath dokha kiya hai mauka parst rajneet se kuch apechhaye nahee ki ja sakte hai

    muslmaan se badkar karmsheel koi vaktee nahee hai : atal bihaaree bajpai

    syaad aap ise bhi jante hai ye sabd kitne sahee hai

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  3. bhai shyam sakha shyam yar rajniti to shakti arthat power hasil karne ka khel hai . itna to hame samajhna hi chahiye ki matbhed ho lekin manbhed na ho ! upar narendra modi , varun gandhi samet sabo ke pujniy " atal jee " ka v jikr hai aur aapne sabhi ke liye dogle shabd ka prayog kar apni aochhi soch jata di hai . atal jee ka sandarbh mein kuchh kahne se pahle jara socha hota ! are khud wartmaan pradhanmantri manmohan singh jee ne unhe bhartiy rajniti ke pitamah bataya tha . matbhed hone chahiye main salleem ji ke wicharon ka samman karta hu kyunki loktantr mein wirodh ka samman jaruri hai jo aaj ke samay mein bilkul hi nahi ho raha . aur tab majboori mein janta ko jute ka sahara lena pad raha hai , aur waise bhi hamare yahan taliban ka shariyat lagu nahi har kisi ko bolne ki aazadi hai ................ par aazadi ka najayaj fayda uthakar gaali dene ke aapke kukritya ka wirodh karta hu aur tamam log jo is post ko padh rahe hai unse aagrah hai ki aise logo ka wirodh kare . kisi bhi mudde par bahas ho gaali-galoj nahi !

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  4. इस दोगलेपन में सबसे आगे तो कांग्रेस है ........... वैसे भी अगर कोई मुस्लिम कट्टर पंथी होगा तो क्या आप उसे भी दोगला और मतलबी कहेंगे .............. अगर हिन्दुओं ने अपनी सहनशीलता को ताकत न बनाकर कमजोरी बनाया तो इस देश से ख़तम होने लगेंगे ......... इसलिए अगर भा ज पा ...........हिंदुत्व का मुद्दा उठाती है तो क्या गलत है .............. कांग्रेस ने कोण सा भला कर दिया अल्पसंख्यकों का ...................

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  5. saleem ji bjp ko aap ne khub kosa lakin jara ye bata de ki sri ram janam bhumi ke vivad ka jyada rajnitik laabh to gair bjp netaon jisme se adiktar aapke samaj ke leedaron ne bhi uthaya hai] is par aap ka muh kayon band hai.

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  6. सलीम भाई , ये तो टीक है ,पर ये तो बताये की राम जन्म भूमि पर श्री राम का मन्दिर बनाने की बात कर हिन्दू समुदाय ने क्या अपराध कर दिया ,आपने हिन्दुओ को खुश करने के लिये ताला खुलवाने की बात तो लिख दी पर शाहबानो का मुद्दा शायद आप भूल गये..यदि भारत के आदि पुरुष श्री राम की फोज से नफरत का माहोल बना तो दोस्त ये तो बताये कि हिंदुस्तान मे सर्व धर्म समभाव का मंत्र कोनसी विचारधारा देती है ,जबाब देने से पहले मुस्लिम बहुल इलाको की भी स्थति देख ले ,आप ने गोधरा दंगो की तो बात कि पर ट्रेन मे जलाये गये लोगो को भूल गये ...सलीम भाई ये देश हम सबका है ..६० सालो से देश को हिन्दू मुस्लिम मे बाँट कर हम बहुत नुकसान कर चुके है....अब देश कि बात करिये ताकि अब हम आगे बढ़ सके ..मुस्लिम समुदाय को आज समय के साथ चलना होगा वरना हिंदुस्तान का मुस्लिम कभी अपना विकास नहीं कर पायेगा

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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