Sunday, May 3, 2009

ब्राह्मण्वादि होना तो जीने की अदा है, तबियत हो तो अपना लीजिये


सुमन जी के लेख " आजाद भारत में ब्राहमणवाद का कफस " पढ़ा। लेख को लेकर काफी प्रतिक्रिया हुई और यह एक गंभीर चर्चा का विषय बन गया ... ऐसा कह कर मैं इस मुद्दे को वो तवज्जो नही देना चाहता।
पहले मैं सुमन जी से ये कहना चाहता हूँ की , अछे और बुरे का होना ,किसी जाती, धर्मं या संप्रदाय की बपौती नही है। पर इस बात को कुछ हद तक स्वीकार जा सकता है की मानवीय गुण और धर्म संस्कार से प्रभावित अवश्य होते हैं
अब जो जिस लायक है , उसे उसका अधिकार तो मिलना चाहिए पूजा सूर्य की होती है , सितारों की नही ! पूजी तुलसी जाती है , बनोल नही ! कहने का तात्पर्य ये है की , गुण - और गुणी सर्वदा पूजनीय होतें हैं।

इससे पहले की आगे की बात की जाए , सुमन जी के लेख पर नज़र डालें ...
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2009/05/loksangharsha-1.html

पहले मैं "ब्राहमण " शब्द के साथ किसी" वाद " जैसी निकृष्ट शब्दावली के प्रयोग का पक्षधर नही हूँ "वाद " कभी भी सिमित होता है , कुछ बुनियादी अवधारणाओं पर , जोंको सत्य या केन्द्र में रखकर , देश कल और परिस्थिति के अनुससार कुछ सूत्र और लक्ष्य पिरोये जाते हैं। "ब्रह्मा " को जानने का क्रम किसी वाद से निरुपित नही हो सकता मैं ये नही कहता की ब्राह्मणों को ब्रह्म की समझ है , परन्तु नस्ल भी कोई चीज़ होती है क्या सारे घोडे एक हीं काबिलियत के होंगे , गर उन्हें एक हीं परिवेश में रखा जाए क्या सरे गहुँ के बिज़ की पैदावार एक सी होगी अगर उन्हें एक -समान माहौल में बोया जाए ? नहीं! क्यों की ... आपके ४० पुश्तों के संस्कार अपमे विधमान हैं।
मैं नही कहता की मैं सुमन जी को कोई जवाब दे रहा हूँ ..परन्तु उनकी ब्राह्मणों के प्रति जो समझ है ..उसकी और एक इशारा जरुर है ....
ब्राहमण , एक जीवन शैली है जहाँ ब्रह्म को जानना यानि ज्ञान का उपार्जन और ज्ञान को समान्य जन की हित में उपयोग करना ,उन्हें शिक्षित करना , इसका ध्येय है क्या आपको नही लगता की कोई ... निम्न - जाती का व्यक्ति अगर , किसी अच्छे पद या ओहदे को प्राप्त कर लेता है , तो अपने मन से उस "निम्न" वाले सोच को त्याग कर , उसे भुला कर भ्रह्मनो सा व्यवहार करने की चेष्टा करता है वह तब स्वयं को निम्न नही समझता।
रक्त सुचिता , और जाती सुचिता का मर्म जाने बगैर किसी बात को कहना नादानी और महज ट्राल्लिंग भर है।

आज मायावती भले हीं , दलित होकर मुख्य मंत्री के पद पर आसीन हो गयीं , पर क्या राज-पाट चलाने के लिए
उन्हें ब्राहमणों या सवर्णों की आवस्यकता नही पड़ी ? उधर ओबामा भले हीं राष्ट्रपति हो , परन्तु उनके विश्वस्पात्रो में
कितने अश्वेत हैं ? चुनाव प्रचार में गरीब और हाशियाग्रस्त समुदाय की बात करने के बाद ओबामा और मायावती , दोनों को क्यूँ अपनी नस्ल नही भाति ?

भारतीय अस्मिता को जितनी क्षति आंबेडकर ने पहुचाई है , उतनी किसी और ने नहीं। आज निम्न - वर्णों के अधिकार की मांग करने वाले कितने सवर्ण हैं और कितने निम्नवर्ण के ? आंकडे देखें तो पता चलता है की अगर अभी तक कुछ उनका हित हुआ है , तो वो भी सवर्णों के हीं नेतृत्व में। और देश को किसने आपनी जात नही दिखाई क्या क्षत्रिओं को अपने क्षत्रित्व पे शर्मिंदगी नही आती जब उनके रहते मुस्लिम आक्रान्ताओं ने भारत की माँ- बेटिओं को अफगानिस्तान ले जा कर नीलाम किया अगर क्षत्रिय अपनी क्षत्रित्व को धिक्कारें ना , तो उन्हें शर्म आनी चाहिए , की १७ आक्रमण के बाद भी किसी को फ़िर से हमला करने देने की मोहलत देना , मुर्खता नहीं तो क्या है। आज भी अफगानिस्तान में ग़ज़नी चौक है , जहाँ लिखा हुआ है " इक भारत की बेटी यहाँ दस रुपये में नीलाम हुई थी "
और वैश्य , अपने कृतित्व को कैसे भूल सकते हैं ...... युध्ध कल में चाहे वह गोरों से हो या मुग़लों से , उनकी छावनी में रह रहे सैनिकों को अन्न-पैसे- और कपड़े मुहैया करना हीं इनी प्राथमिकता रही। क्या इनके सहयोग के बिना भारत घुलाम रह पता !

शूद्रों को देखें १८५७ का विद्रोह के नाकामयाबी के पीछे इनका सबसे बड़ा हाथ है दक्षिण भारत का सहयोग ना होने से हमारा विद्रोह असफल हो गया उनका मानना था की गर हम जीत गए तो सत्ता का स्वरुप वापस "राजतन्त्र " होगा , जिसमे हमारी नियति पूर्व की हीं होगी
बातें बहुत हैं .... आप किसी जातिगत टिपण्णी कर के आपने दमन को साफ़ नही बता सकते। जरूरत यह नहीं की , इतिहास कुरेद कर कड़वाहट सामने लायी जाए। सुमन जी , गाय घास खाकर दूध देती है , और सौंप दूध पीकर जहर देता है ...

6 comments:

  1. kya khub kahi kanishka bhai...
    he he aap hain to hai jo brahmano ki naak hai..
    aakhi line ne to saara mamla hi khatam kar diya..

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  2. oye jairam bhayia ji jahan dekhon aa kar.........
    kya khitchrii pakk rahi hai.......

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  3. kitne andaj se mithi goli dete hai yeh log ki hindutava aur brahamanvad to jeene ki kala hai........

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  4. sach karrva hota hai sunne ki shakti bahut kamm logo main hoti hai

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  5. thanks kanishka for pointing to a very gud article

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  6. suman jee ko pata bhi nahi chala aur aapne saari baat kah dee..
    kanishka bhaiya lekhak ka, aur neta jyada lagtein hain..

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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