Sunday, May 24, 2009

ग़ज़ल

आज सितारे आँगन में है उनको रुखसत मत करना
शाम से मैं भी उलझन में हू तुम नही गफलत मत करना
हर आँगन में दिए जलाना, हर आँगन में फूल खिलाना
उस बस्ती में सब कुछ करना हम से मोहब्बत मत करना
अजनबी मुल्कों अजनबी लोगों में आकर मालूम हुआ
देखना सारे ज़ुल्म वतन में लेकिन हिजरत मत करना
उसकी याद में दिन भर रहना आंसू रो के चुप साधे
फिर भी सबसे बातें करना उसकी शिकायत मत करना

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--- संजय सेन सागर

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