Wednesday, May 13, 2009

गीत (माँ)

अम्बर की यह ऊंचाई धरती की यह गहराई
तेरे मन में है समाई , माई वो माई
तेरा मन अमृत का का प्याला येही "काबा" येही "शिवाला"
तेरी ममता पवन दाई, माई वो माई
जी चाहे जो तेरे साथ रहू मै बन के तेरा हमजोली
तेरे हाथ न आऊ छुप जाऊ यह खेलु आँख मिचोली
पर्यियों की कहानी सुना के कोई मीठी लोरी
कर दे सुना के सुख दाई , माई वो माई
जाड़ो की ठंडी रातों में घर लौट के जब मै आऊ
हलकी सी दस्तक पर अपनी तुझे जागता मै पाउ
सर्दी से जो मै तिठुरता जाऊ
तो मै रजाई अपने ऊपर पौ
लेकिन ठंडा सतर अपनाई, माई वो माई
अम्बर की यह .......धरती की ..............
तेरे मन में है समाई ...........माई वो माई .

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--- संजय सेन सागर

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