Thursday, May 14, 2009

ग़ज़ल

ए मेरी जाने ग़ज़ल ......
ए मेरी जाने ग़ज़ल.......
कोई मिलता नहीं ही तेरी तरह तेरा बदल
ए मेरी जाने ग़ज़ल.....
ए मेरी जाने ग़ज़ल....
तेरी आंखें है या कोई जादू.....
तेरी बातें है या कोई खुशबू....
जब भी सोचता हूँ तुझको दिल जाता है मचल
ए मेरी जाने ग़ज़ल.......
तेरी यादों में रोज़ रोता हूँ
सुबह होती है तो मैं सोता हूँ
तुझको पाने में खुद को खोता हूँ
तू मुझे अपना बना ले या मेरे दिल से निकल
ए मेरी जाने ग़ज़ल........
हर सू बजती है शहनाई
खुशबू बनती है पुरवाई
जब तू लेती है अंगडाई
यूँ खिले तेरा बदन जैसे कोई ताजा
कँवल ए मेरी जाने ग़ज़ल.........
पागल कर देगी तेरी तन्हाई
कैसे सहूँ मैं तेरी
जुदाई अब तो आजा ए हरजाई
बिन तेरे मेरा गुज़रता नहीं मेरा एक पल
ए मेरी जाने जाने ग़ज़ल........
मैं तेरा दिल हूँ तू धड़कन है
मैं चेहरा हूँ तू दर्पण है
मैं प्यासा हूँ तू सावन है
मैं तेरा शाहजहाँ
तू मेरी मुमताज़ महल
ए मेरी जाने ग़ज़ल.......
ए मेरी जाने ग़ज़ल.............

1 comment:

  1. ग़ज़ल तो नहीं लेकिन यह ज़रूर कहूंगा कि सुंदर रचना है। सुंदर भावों और अच्छे शब्दों के चुनाव के
    साथ एक अच्छी कविता है।
    महावीर शर्मा

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--- संजय सेन सागर

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