Friday, April 17, 2009

Loksangharsha: मन नदी तट गावँ

मन नदी तट गावँ




मन नदी तट गावँ है तेरे बिना ।
डूबती सी नाव है तेरे बिना ॥
चल लहर सा पर कही पंहुँचा नही -
जिंदगी बस पाँव है तेरे बिना॥
अनगिनत है जाल माया हाथ में -
तन मगन मन दाव है तेरे बिना ॥
है अतल तल को उजेरे की ललक-
चिल चिलाती छाँव है तेरे विना ॥

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही '

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