Wednesday, April 15, 2009

Loksangharsha

Loksangharsha


कहेगा कैसे भला कोई वे अमाँ हमको।
की जब नवाज़ रहा है ये आसमां हमको ।

कोई ठिकाना नही है जुनूपरस्तों का
फ़िर आप ढूंढेंगे आख़िर कहाँ कहाँ हमको ।

गुलो का खार जमीं को फलक पड़े कहना
इलाही कर दे हमको इस आलम में बेजबाँ हमको ।

जमीन क्या है मुन्नवर है जिनसे अर्शेवारी
खुशनसीब मिला उनका आसमां हमको।

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही '

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर