Tuesday, April 28, 2009

ग़ज़ल-दिल की लगी

दिल की लगी इस दिल्लगी पर क्यों न मर जाए कोई ,
या खुदा इस दिल्लगी पर ,क्या न कर जाए कोई
ऐ जिंदगी ! तू ही बता , ये राज कैसा राज है ,
दिल मैं बस बैठा मगर ना दिल मैं बस पाये कोई
दिल के करीव है वही जो आज हमसे दूर है,
भूलना चाहें जिसे क्यों याद फ़िर आए कोई ।
दर्द तो दिल मैं है पर मीठी सी है तासीर भी ,
इस दर्दे दिल की दास्ताँ का क्या बयान गाये कोई ।
दिल की लगी की ये लगी मीठी तो है प्यारी भी है ,
श्याम मीठी छुरी के क्या ज़ख्म भर पाये कोई ।।

1 comment:

  1. दिल के करीब है वही जो जो आज हमसे दूर है,....बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ है..!आजकल यही सब तो हो रहा है...!इस दर्दे दिल का कोई इलाज नहीं है...

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--- संजय सेन सागर

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